
सूरत। सूरत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में व्यावसायिक उद्देश्य शामिल हो या जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी एवं आपराधिक प्रकृति के गंभीर आरोप हों, ऐसे मामलों की सुनवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत नहीं की जा सकती। आयोग ने यह टिप्पणी करते हुए कटारिया ऑटोमोबाइल्स प्रा. लि. द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा, किम शाखा के विरुद्ध दायर मुआवजा याचिका को खारिज कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कटारिया ऑटोमोबाइल्स प्रा. लि. के मैनेजर सुनील सालुंके ने आयोग में शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि कंपनी के कैशियर नयन वाघेला ने बैंक की स्लिप बुक में गड़बड़ी कर करीब 8.29 लाख रुपये से अधिक की राशि कंपनी के करंट खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी खाते में जमा कर ली। शिकायत में कहा गया कि बैंक कर्मचारियों की लापरवाही के कारण कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, इसलिए बैंक को ब्याज सहित मुआवजा देने का आदेश दिया जाए।
मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से अधिवक्ता श्रेयस देसाई, ईशान देसाई और प्राची अर्पित देसाई ने दलील दी कि शिकायतकर्ता कंपनी बड़े पैमाने पर वाहन बिक्री और सर्विसिंग का व्यवसाय करती है तथा उसका बैंक खाता कैश क्रेडिट श्रेणी का होने से स्पष्ट रूप से व्यावसायिक उद्देश्य के अंतर्गत आता है। साथ ही प्रकरण में धोखाधड़ी, जालसाजी और वित्तीय गबन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनकी विस्तृत जांच, साक्ष्य और गवाहों की आवश्यकता होती है, जो उपभोक्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
सूरत जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आर.एल. ठक्कर तथा सदस्य पूर्वीबेन जोशी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता का बैंक खाता व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित होने के कारण उसे उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। आयोग ने यह भी माना कि कथित धोखाधड़ी एवं आपराधिक साजिश जैसे आरोपों का निर्णय सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा ही किया जा सकता है।
इन कारणों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने कटारिया ऑटोमोबाइल्स प्रा. लि. द्वारा दायर शिकायत को निरस्त करने का आदेश पारित किया।




