साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर जैन समाज का मौन आक्रोश: हजारों श्रद्धालुओं ने निकाली विशाल मौन रैली
साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर सूरत में जैन समाज का शक्ति प्रदर्शन

जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, देशभर में जैन साधु-संतों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की उठाई मांग
सूरत। देशभर में जैन साधु-संतों के साथ लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और उनसे जुड़ी संदिग्ध घटनाओं के विरोध में शुक्रवार को सकल जैन समाज, सूरत के तत्वावधान में विशाल मौन रैली का आयोजन किया गया। प्रातः 8:30 बजे सरगम शॉपिंग सेंटर, पार्ले पॉइंट से प्रारंभ हुई यह रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर संपन्न हुई, जहां समाज के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जैन साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
रैली में बड़ी संख्या में जैन श्रावक-श्राविकाएं, युवा, महिलाएं, व्यापारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं विभिन्न जैन संस्थाओं के पदाधिकारी शामिल हुए। सभी ने मौन रहकर संत समाज के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की तथा हाल ही में घटित घटनाओं पर गहरा रोष प्रकट किया।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 20 मई 2026 को रीवा (मध्यप्रदेश) में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की परम शिष्या श्रद्धेय आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी एवं श्रद्धेय आर्यिका श्री उपशांतमति माताजी सड़क किनारे विहार कर रही थीं, तभी एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इस हादसे में एक माताजी का घटनास्थल पर ही निधन हो गया, जबकि दूसरी माताजी ने उपचार के दौरान देह त्याग दिया। इस घटना से पूरा जैन समाज स्तब्ध है।
समाजजन अभी इस दुखद घटना से उबर भी नहीं पाए थे कि 28 मई 2026 को गुजरात के चोटिला (राजकोट) क्षेत्र में श्री प्रेमभुवनभानुसूरी समुदाय के उपनय सम्राट परम पूज्य आचार्य श्री अजितशेखरसूरिजी महाराज साहेब के शिष्य, परम पूज्य पन्यास प्रवर श्री ॐकारशेखर विजयजी गणिवर्य का भी सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। इन लगातार हो रही घटनाओं ने जैन समाज में गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संत परंपरा की सुरक्षा और धार्मिक अस्तित्व की रक्षा का संकल्प है। जैन साधु-संत अहिंसा, संयम और मानवता का संदेश देते हुए देशभर में पदयात्रा करते हैं। ऐसे में उनके विहार मार्गों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना आवश्यक है।
समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि भारत में जहां-जहां जैन साधु-संत विहार कर रहे हैं, वहां प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाए तथा ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
रैली के समापन पर समाजजनों ने एक स्वर में कहा कि धर्म रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि एकजुटता और जागरूकता से होती है। जैन समाज संतों की सुरक्षा और सम्मान के लिए सदैव संगठित रहेगा।



