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श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन महारास, कंस वध और रुक्मिणी विवाह प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर सोमवार को हवन एवं महाप्रसाद के साथ होगा सात दिवसीय कथा का समापन

सूरत। श्री शक्ति धाम सेवा समिति द्वारा श्री राणी सती दादी मंदिर के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन रविवार को श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे। सिटी लाइट स्थित महाराजा अग्रसेन पैलेस के पंचवटी हॉल में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में भक्तों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यजमान परिवार ने विधि-विधान से व्यासपीठ का पूजन एवं आरती की। इसके बाद आयोजन समिति ने भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया। व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए शास्त्रीजी ने महारास लीला, कंस वध, उद्धव-गोपी संवाद और रुक्मिणी विवाह जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराधा और श्रीकृष्ण एक-दूसरे के अभिन्न स्वरूप हैं तथा गोपियों का निष्काम प्रेम सच्ची भक्ति और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

महारास लीला को आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति में स्वार्थ, अहंकार और तर्क का स्थान नहीं होता। वहीं कंस वध प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं।

कथा के दौरान भक्ति गीतों और फूलों की होली ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूम उठे और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।

आयोजन समिति ने बताया कि सोमवार को प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक मुक्ति स्कंध, सुदामा चरित्र, श्री शुकदेवजी की विदाई एवं भागवत विश्राम का वर्णन होगा। इसके पश्चात हवन तथा अपराह्न 2 बजे महाप्रसाद के साथ सात दिवसीय कथा का समापन किया जाएगा।

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