गुरु पूर्णिमा पर नवकार महामंत्र जाप के साथ चातुर्मास का शुभारंभ
आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. ने गुरु महिमा का किया वर्णन, चातुर्मास को बताया धर्म, ध्यान और तप का महापर्व

सूरत। आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आचार्य सम्राट पूज्य डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. आदि ठाणा-10 का चातुर्मासिक प्रवास आत्म भवन, अवध संगरीला, बलेश्वर में प्रारंभ हो गया। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप के साथ चातुर्मास का शुभारंभ हुआ।
आचार्य भगवंत के सान्निध्य में पूरे चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक एवं साधना संबंधी आयोजन होंगे। देश के विभिन्न शहरों से श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहेगा तथा तप, जप, आराधना और विविध तपस्याओं का क्रम भी प्रारंभ होगा। चातुर्मास को धर्म, ध्यान और तपस्या के माध्यम से कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ पर्व माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा एवं चातुर्मास स्थापना के अवसर पर आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आज का दिन सभी के लिए मंगलकारी है। गुरु वह है जो साधक में अष्टगुणों के प्रति रुचि उत्पन्न करे और उसकी अंतर्निहित शक्तियों को जागृत करे। जैसे कुम्हार कच्ची मिट्टी को आकार देकर उपयोगी पात्र बनाता है, उसी प्रकार सद्गुरु शिष्य के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि सत्य केवल बोलने का विषय नहीं, बल्कि सत्य को जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना है। परम गुरु केवली भगवान हैं, जो त्रिलोक के ज्ञाता और द्रष्टा हैं। सद्गुरु शिष्य को भवसागर से पार लगाने की सामर्थ्य रखते हैं तथा उसके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाते हैं। सच्चा गुरु वही है, जो भीतर के अंधकार को पूर्णिमा के प्रकाश में परिवर्तित कर दे।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मज्ञानी महापुरुषों का जीवन में मिलना अत्यंत दुर्लभ सौभाग्य है। ऐसे सद्गुरु मनुष्य के जीवन को दिशा देते हैं और आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालु सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें आचार्य भगवंत जैसे आत्मज्ञानी सद्गुरु का सान्निध्य प्राप्त हुआ है।
इस अवसर पर प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा., मधुर गायक श्री निशांत मुनि जी तथा श्री शाश्वत मुनि जी म.सा. ने प्रवचन, भजन एवं प्रेरक विचारों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। वहीं श्रीमती संजू बहन एवं श्री ऋषभ जैन ने भी भजनों की प्रस्तुति देकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
चातुर्मास स्थापना के प्रथम दिवस सूरत के विभिन्न उपनगरों के साथ-साथ दिल्ली, मुंबई, उदयपुर, राहाता सहित अनेक स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरु चरणों में उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अशोक मेहता ने किया।



