नाम ख्याति की भावना के बिना करे सेवा कार्य : युगप्रधान आचार्य महाश्रमण
कानून एवं न्याय राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल पहुंचे शांतिदूत के दर्शनार्थ

– नवदीक्षित साधु साध्वियों को प्रदान की गई बड़ी दीक्षा
– अणुव्रत क्रिएटिव कॉन्टेस्ट राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित
10.09.2025, बुधवार, कोबा, गांधीनगर।सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेश देश विदेश में मानवता की अलख जगाने वाले अणुव्रत अनुशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में आज भारत सरकार के कानून एवं न्याय राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल दर्शन करने पहुंचे। आचार्य श्री के सान्निध्य में आज अणुव्रत क्रिएटिव कॉन्टेस्ट की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का मंचीय आयोजन हुआ। वहीं दिनांक 3 सितंबर को दीक्षित होने वाले 17 नवदीक्षित साधु साध्वियों की बड़ी दीक्षा का भी कार्यक्रम समायोजित हुआ। जिसमें गुरूदेव ने पांच महाव्रतों का व्याख्यपूर्वक से स्वीकरण कराते हुए नवदीक्षितों को छेदोपस्थानीय चारित्र प्रदान किया। अणुव्रत की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के तहत 18 राज्यों से 350 विद्यार्थी प्रस्तुति देने पहुंचे। अखिल भारतीय संत समिति, निष्कलंकी नारायण तीर्थ धाम प्रेरणा तीर्थ के जगद्गुरु सत्पंथाचार्य ज्ञानेश्वर देवाचार्य महाराज भी आज के समारोह में सहभागी बने।

मंगल प्रवचन में गुरूदेव ने कहा – यश, कीर्ति के लिए कोई कार्य नहीं करे। निष्काम भाव से कार्य करना चाहिए। सकाम और अकाम निर्जरा के दो भेद है। मोक्ष की कामना से तपस्या की जाती है वह सकाम निर्जरा होती है। कार्य करे तो परमार्थ की भावना से करे। नाम ख्याति की कामना से धर्म की साधना तपस्या नहीं करनी चाहिए। जहां नाम की भावना जुड़ जाती है वहां आत्मा में मलीनता आजाती है। आज इन नवदीक्षितों की बड़ी दीक्षा है। इन्हें छेदोपस्थापनीय प्रदान किया गया है। सामायिक चारित्र में ये थोड़े से हमसे भिन्न थे अब सभी समान हो गए है। यह साधना का जीवन बहुत ही मूल्यवान है। संन्यास साधना के समक्ष दुनिया के सभी धन वैभव तुच्छ है। साधुत्व के प्रति आस्था, श्रद्धा, निष्ठा बनी रहे। यह संयम जीवन अमूल्य है। पांच महाव्रत एक एक हीरे के समान है। इनकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता बनी रहे। पांच महाव्रत और रात्रिभोजन विरमण व्रत का निष्ठा से पालन हो। शरीर में कोई कष्ट हो जाए उसे समता से सहन करते है तो वह महान फल देने वाला बन जाता है। इन्होंने गृहवास को छोड़ कर साधुत्व को, समणीत्व को स्वीकार कर बहुत बड़ा कार्य किया है।

अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आगे प्रेरणा देते हुए कहा कि अणुव्रत विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने कि दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बच्चों में अच्छे संस्कार और साथ में ज्ञान का विकास, कॉन्फिडेंस का विकास होता है साथ में जीवन में प्रामाणिकता, नैतिकता रहती है वह विद्यार्थी भविष्य में और अधिक उपयोगी बन सकते है। मर्यादा में सभी को रहना होता है। ड्यूटी एंड डिसिप्लिन दोनों जरूरी है। कर्तव्य निष्ठा और अनुशासन नहीं हो तो लोकतंत्र विनाश को प्राप्त हो जाएगा। आज मेघवाल जी आए है न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका से जुड़े हुए है। एक व्यक्ति कई आयामों से जुड़े हुएं है। जैन विश्व भारती इंस्टीट्यूट, अणुव्रत और हमारे तेरापंथ से जुड़े हुए है। राजनीति के साथ अणुव्रत अध्यात्म जुदा रहे यह आवश्यक है।

कानून न्याय मंत्री श्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि संविधान ने हमें मूल अधिकार दिए हुए है वहीं संविधान हमें कर्तव्य भी देता है। नैतिकता जीवन में बहुत आवश्यक है।
अखिल भारतीय संत समिति, निष्कलंकी नारायण तीर्थ धाम प्रेरणा तीर्थ के जगद्गुरु सत्पंथाचार्य ज्ञानेश्वर देवाचार्य महाराज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण जी को में वंदन करता हूं। जैन शासन बहुत अद्भुत है, तप साधना और संयम इसका मुख्य मंत्र है।

कार्यक्रम में अणुविभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रताप दुगड़, अभातेयुप से श्री राजेश सुराणा ने अपने विचार रखे।
अणुव्रत क्रिएटिव कॉन्टेस्ट के अंतर्गत उत्तर प्रदेश प्लेटिनम वेली स्कूल गाजियाबाद के बच्चों से समूह गीत का संगान किया। राजस्थान सेंट गागोरियस स्कूल उदयपुर से लब्धी जैन आदि कई राज्यों के स्कूली विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति दी।



