जीवन में कुछ पढ़ो ना पढ़ो भगवान महावीर के सिद्धातों को जरूर पढ़ना-आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वर
दादा जिनचन्द्रसूरी गुरूदेव ने जैन धर्म को एक नई दिशा दी-खरतरगच्छाधिपति

माताजी म.सा. रतनमालाश्री के पुण्य स्मृति में 1008 सामुहिक तेले 03 उपवास की आराधना होगी
बाड़़मेर 09 सितम्बर। कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड स्थित सुधर्मा प्रवचन वाटिका में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास कमेटी के तत्वाधान में संघ शास्ता वर्षावास 2025 का चातुर्मास खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. की पावन निश्रा व बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुत्प्रभाश्री व श्रमण-श्रमणीवृन्द के पावन सानिध्य में मंगलवार को आचार्यश्री ने दादा गुरूदेव श्री जिनचन्द्रसूरि की 412वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विशाल ध्ार्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन में कुछ पढो या नही पढो जीवन का सार अगर समझना है तो परमात्मा महावीर का उततराधन सुत्र अवश्यक पढना। अगर आपने इस सुत्र को पढकर समझ लिया तो जीवन में फिर कोई सवाल शेष नही रहेगा। परमात्मा महावीर की अन्तिम देशना का सार है उत्तराधन सुत्र। जैन शासन में कई महापुरूष हुए,कई ऐसी आत्माएं हुई जिनके बुते पर आज देखों जैन समाज कम संख्या में होने के बाद भी सर्वोच्च माना जाता है। ऐसे ही एक आचार्य हुए जिन्होंने जिन शासन के इतिहास में संयम, त्याग, तप और आराधना साधना के बल पर जिनशासन की महती प्रभावना की। 16वीं से 17वीं शताब्दी के मध्य आपने जैन शासन में श्रावक-श्राविकाएं कैसे संयमित रहे एवं जैन धर्म अनेको को दीक्षा प्रदान की। मात्र नौ वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण करके मात्र सतरह वर्ष की उम्र में आचार्य बन कर सम्पूर्ण खरतरगच्छ के अधिपति बने।उन्होंने निश्रा के समस्त यतियों को साधु होने के लिये प्रेरित किया और आदेश दिया कि यदि साधु नहीं बन सको तो गृहस्थ हो जाओ। मगर यति की श्रेणि नहीं रहेगी।उन्होंने अपने ज्ञान व साधना के बल पर सम्राट् अकबर को प्रतिबोध देकर उसे अहिंसक बनाया। सम्राट अकबर के जीवन पर उनका अनूठा प्रभाव था। इस बात का पूरा वर्णन आइने अकबरी में साहित्यकार अबुल फजल ने किया है। उन्होंने दादा गुरुदेव के जीवन की घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि दादा गुरुदेव ने जिनशासन की रक्षा के लिये अमावस्या की रात में भी पूर्णिमा की भाति चांद के दर्शन करवा दिए थे। ऐसे दादा गुरूदेव की 412वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष में बिलाड़ा दादावाड़ी में भव्य मेला आयोजित हो रहा है।

चातुर्मास कमेटी के सचिव बाबुलाल बोथरा हेमरत्न व मीडिया संयोजक कपिल मालू ने बताया कि सुधर्मा प्रवचन वाटिका में मंगलवार को बाहरी राज्यों से संघवी तेजराज गुलेच्छा मोकलसर, मोकलसर जैन श्री संघ अध्यक्ष भंवरलाल पालरेचा, भूपेन्द्र चिफड़ प्रतापगढ, अशोक बाफना मोकलसर, प्रदीप जैन जोधपुर, रतनलाल गुलेच्छा मोकलसर,अभिषेक कटारिया केसकाल,सुभाषचन्द कटारिया केसकाल, डाॅ.शैलेश चीफड़, विजयकुमार प्रतापगढ, हनवंतराज गुलेच्छा,विजय नाहर,पंकज पारख बाड़मेर पहुंचे गुरूभक्त व गुरूभक्तों का चातुर्मास कमेटी द्वारा बहुमान किया गया व सुभाष कटारिया ने गुरूभक्ति गीत प्रस्तुत किया।

प्रवचन के बाद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ मोकलसर द्वारा संघ पूजन किया गया। 18 सितम्बर से खरतरगच्छाधिपति सूरि मंत्र की पीठिका की साधना में रहेंगे, उस सूरि मंत्र की पीठिका का लाभ श्री कांतिमणि भक्त परिवार द्वारा लिया गया। माताजी म.सा. की पुण्य स्मृति में 1008 सामुहिक तेले 03 उपवास की आराधना होगी। आगामी आसोज की नवपद ओलीजी का लाभ श्रीमती हऊआदेवी सुरतानमल मालू परिवार चोहटन-भाभर-अहमदाबाद द्वारा लिया गया। 20 से 22 दिसम्बर तक होने वाले त्रिदिवसीय कार्यक्रम में मोकलसर जैन श्री संघ का स्नेह मिलन के कार्यक्रम में निश्रा प्रदान करने के लिए अध्यक्ष भंवरलाल पालरेचा द्वारा आचार्यश्री को विनती की गई



