अरिहंत के मार्ग पर चलने वाला सुसाधु है: आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा.

अवध संगरीला, बलेश्वर, सूरत।आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि श्री आचारांग सूत्र के वर्णन के अनुसार व्यक्ति को स्वयं को बोध हो कि वह छः दिशाओं में किस ओर से आया है और उसका लक्ष्य क्या है। जीवन में प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य होता है, इसी प्रकार एक आत्मा की साधना करने वाले श्रावक को यह बोध हो कि उसका लक्ष्य इस संसार सागर से पार होना है। व्यक्ति में सभी जीवों के साथ मैत्री का भाव रहे और प्रत्येक जीव के आकार में उस निराकार आत्मा को जाने।
आचार्य भगवन ने मंगल उद्बोधन में आगे फरमाया कि व्यक्ति के मन में यह प्रश्न हो सकता है कि ‘विनय किसकी करें?’ चार की विनय करनी चाहिए जिसमें भगवान, भगवान की वाणी, भगवान का शासन और सुसाधु है। भगवान जो तीनों लोकों को जानते हैं। भगवान की वाणी जिसके स्वाध्याय से हमें ज्ञान की प्राप्ति होती है, भगवान का शासन जिसमें हम सभी रह रहे हैं और सुसाधु वह है जो अरिहंत के मार्ग पर चलते हैं उनके प्रति विनय का भाव रहे और उनकी सेवा करनी चाहिए।
उन्होंने लोगस्स पाठ का महत्त्व बताते हुए फरमाया कि लोगस्स का पाठ सम्यक्त्व की शुद्धि करने वाला होता है। इसका प्रत्येक श्रावक को नियमित पाठ करना चाहिए। लोगस्स के पाठ में चौबीस तीर्थंकर भगवान की स्तुति के साथ हमारे जीवन का लक्ष्य बताया गया है। उस लक्ष्य के अनुसार हम अपने कदम गतिमान करें। अपने धन का सद्उपयोग करते हुए जरूरतमंद की सहायता करनी चाहिए जिससे कर्मो की निर्जरा होती है।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने उद्बोधन में फरमाया कि अपनी आत्मा को अपनी आत्मा से ही समझाने वह साधु है साधु के गुण है। मन बुद्धि इन्द्रिया ये सब पर है और पराई है। जो विभाव वाली अवस्था को समझाती है, आर्त्त-रौद्र ध्यान उस आत्मा को कौन समझाता है, आत्मा के पास अनन्त ज्ञान है। व्यक्ति पर संगति और कुसंगति में फंस जाता है। पर संगति पुद्गल है और पुद्गल में सुख ढूंढना कुसंगति है। साधु को सत्यवादी होना चाहिए, पांचों इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करने वाला होना चाहिए। जो शिष्य गुरु का भक्तिपूर्वक विनय सत्कार करते हैं उनका सत्कार भाव व्यर्थ नहीं जाता।
युवामनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘एक भावना हर क्षण में रहे समाधि जीवन में’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।
आज प्रातःकाल अक्षर टाउन, सूरत से शील महिला मण्डल का संघ गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हुआ। आज धर्म सभा में चैन्नई, सिरसा, बैंगलोर आदि क्षेत्रों से श्रद्धालुगण उपस्थित हुए। आज नवदीक्षित श्री शूचित मुनि जी महाराज के 11 उपवास का पारणा हुआ।




