नासिरनगर डिमोलिशन विवाद में मनपा की बड़ी कबूलात
कमिश्नर ने माना—कार्रवाई सूरत मनपा ने ही की, हाईकोर्ट में मामला होने से विस्तृत टिप्पणी से परहेज

सूरत। वेड दरवाजा स्थित नासिरनगर में हुए चर्चित डिमोलिशन मामले में आखिरकार सूरत महानगरपालिका की ओर से बड़ा खुलासा सामने आया है। मनपा आयुक्त एम. नागराज ने स्पष्ट किया है कि संबंधित डिमोलिशन कार्रवाई मनपा द्वारा ही की गई थी। उन्होंने कहा कि टीपी रोड पर लाइनदोरी के अमल और आवश्यक डिमोलिशन की कार्रवाई करने का अधिकार मनपा के पास है।
आयुक्त ने ‘माय सूरत’ फेसबुक अकाउंट पर जारी वीडियो संदेश में बताया कि गत 30 मई को सेंट्रल जोन के वरिष्ठ अधिकारी पुलिस बंदोबस्त के साथ नासिरनगर क्षेत्र में लाइनदोरी के अमल और डिमोलिशन की कार्रवाई के लिए पहुंचे थे। इस दौरान नियमानुसार डिमार्केशन और लाइनदोरी की प्रक्रिया की गई तथा आवश्यक हिस्से में डिमोलिशन भी किया गया।
*पहले इनकार, अब स्वीकारोक्ति से उठे नए सवाल*
कमिश्नर ने कहा कि इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर हो चुकी है और सूरत मनपा भी पक्षकार है, इसलिए फिलहाल इस विषय पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अदालत के समक्ष सभी आवश्यक दस्तावेज, तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे तथा कोर्ट के निर्णय का पालन किया जाएगा।
आयुक्त ने यह भी स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह डिमोलिशन मनपा द्वारा नहीं किया गया था, लेकिन बाद में जांच में सामने आए तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि मनपा के अधिकारी डिमार्केशन के लिए मौके पर गए थे और कार्रवाई के दौरान नियमानुसार लाइन के भीतर डिमोलिशन किया गया।
*राजनीतिक और सामाजिक विवाद के बीच हाईकोर्ट पर टिकी नजर*
मनपा की इस स्वीकारोक्ति के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि कार्रवाई मनपा ने ही की थी तो प्रारंभिक स्तर पर इससे इनकार क्यों किया गया। साथ ही यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि क्या इस पूरे प्रकरण में किसी अधिकारी की भूमिका, लापरवाही या किसी प्रकार का दबाव था। नासिरनगर डिमोलिशन प्रकरण पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस ने भी इस मामले में जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। अब पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और हाईकोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




