सूरत। सूरत का कपड़ा उद्योग इस समय दोहरी आपदा का सामना कर रहा है। एक ओर हाल ही में आई खाड़ी बाढ़ से स्थानीय व्यापार पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया था, वहीं दूसरी ओर आसाम और ओडिशा में आई भीषण बाढ़ ने पूर्वोत्तर राज्यों से होने वाले कपड़ा कारोबार पर गहरा असर डाल दिया है। दुर्गा पूजा सीजन को देखते हुए हर वर्ष होने वाला लगभग 1000 करोड़ रुपये का व्यापार इस बार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर आसाम, सूरत के कपड़ा उद्योग का प्रमुख बाजार माना जाता है। यहां की पारंपरिक मेखला चादर, साड़ियां, सूट, परदे और लेस-पट्टी की बड़ी मात्रा में खरीदारी सूरत से होती है। हर साल दुर्गा पूजा से पहले आसाम के व्यापारी बड़ी संख्या में सूरत पहुंचकर माल खरीदते हैं, लेकिन इस बार बाढ़ के कारण वहां का जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होने से खरीदारी लगभग ठप हो गई है।
आसाम के शिवसागर, जोरहाट, नाजीरा, लखीमपुर और धेमाजी सहित कई जिलों में बाढ़ का पानी भर जाने से बाजार बंद हैं और व्यापारियों ने नई खरीद फिलहाल रोक दी है। इसका सीधा असर सूरत के कपड़ा बाजार में दिखाई देने लगा है। जहां पहले एक-एक दुकान पर दर्जनों व्यापारी खरीदारी के लिए पहुंचते थे, वहीं अब बाजारों में ग्राहकों की संख्या बेहद कम है।
बाढ़ का असर केवल नए ऑर्डरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले भेजे गए माल के भुगतान को लेकर भी व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। आसाम के बाजारों से पहले भी भुगतान में देरी होती थी, लेकिन मौजूदा हालात के चलते करोड़ों रुपये की बकाया राशि और अधिक समय तक फंसने की आशंका है। व्यापारियों का कहना है कि भुगतान मिलने की उम्मीद तो है, लेकिन इसमें कितना समय लगेगा, यह फिलहाल कोई नहीं बता सकता।
स्थिति का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि कुछ व्यापारी अब अंडर कॉस्ट कीमतों पर तैयार माल खरीदने की मांग कर रहे हैं। कपड़ा व्यापारियो के अनुसार, पहले जो साड़ी 330 रुपये में बिकती थी, उसके लिए अब 220 रुपये की पेशकश की जा रही है। ऐसी स्थिति में बिक्री करने का मतलब सीधे नुकसान उठाना है।
व्यापारियों का मानना है कि यदि पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो दुर्गा पूजा का सीजन कमजोर रह सकता है। इससे नए ऑर्डर, माल की सप्लाई और पुराने भुगतान—तीनों पर असर पड़ेगा तथा सूरत के कपड़ा उद्योग को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।




