योग से आधि, व्याधि और उपाधि का समाधान संभव : मुनि श्री डॉ. मदनकुमारजी
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर तुलसी दर्शन, भटार रोड में हुआ प्रेरक मंगल उद्बोधन

सूरत। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में भटार रोड स्थित तुलसी दर्शन अपार्टमेंट परिसर में अणुव्रत अनुशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री डॉ. मदनकुमारजी के सान्निध्य में मंगल प्रवचन एवं उद्बोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति का अद्भुत अंग है और यह केवल एक दिवस की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ने वाली साधना है।
मुनि श्री डॉ. मदनकुमारजी ने कहा कि प्रेक्षाध्यान योग के माध्यम से प्रज्ञा का जागरण होता है और संयम ही इसका मूल सूत्र है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की पांच इन्द्रियां और मन यदि संयमित हों तो जीवन में शांति, संतुलन और सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने आचार्य श्री तुलसी एवं आचार्य महाप्रज्ञजी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधि, व्याधि और उपाधि जैसी तीन प्रमुख समस्याओं—मानसिक तनाव, शारीरिक रोग और भावनात्मक विकार—से मुक्ति का प्रभावी मार्ग प्रेक्षाध्यान, योग और प्राणायाम है।

मुनिश्री ने कहा कि आज के समय में अहंकार, तनाव और असंतुलित जीवनशैली अनेक रोगों की जड़ बन रही है। ऐसे में योग, ध्यान और आध्यात्मिक चिकित्सा को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। कार्यक्रम में मुनि श्री संयमकुमारजी ने चौबीसी के गीतों का संगान किया, जबकि मुनि श्री कल्पकुमारजी ने धर्म, संयम और प्रेक्षाध्यान के महत्व पर विचार रखे।
इस अवसर पर उपासक अमृतजी मेहता ने स्वागत वक्तव्य दिया। अर्जुनजी मेडतवाल, सोहनजी भोगर, अमृतजी मेहता आदि ने प्रेक्षा गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन प्रेक्षा प्रशिक्षक अर्जुन मेडतवाल ने किया।




