
सूरत। एटीएम मशीन से नकदी नहीं निकलने के बावजूद ग्राहक के बैंक खाते से राशि डेबिट किए जाने के मामले में सूरत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एडिशनल) ने राष्ट्रीयकृत बैंक को जिम्मेदार ठहराते हुए ग्राहक के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग के अध्यक्ष आर. एल. ठक्कर ने शिकायतकर्ता की आंशिक शिकायत मंजूर करते हुए बैंक को 30 दिनों के भीतर 10,000 रुपये 9% वार्षिक साधारण ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि 24 फरवरी 2017 के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र के अनुसार देरी के प्रत्येक दिन के लिए 100 रुपये अतिरिक्त भुगतान भी ग्राहक को किया जाए।
मामले के अनुसार, डुंभाल स्थित अवधूतधाम सोसायटी निवासी जीतेशकुमार महेंद्रकुमार गांधी ने उधना शुभ रेसिडेंसी के पास स्थित एसबीआई एटीएम से पैसे निकालने का प्रयास किया था। हालांकि एटीएम मशीन से नकदी बाहर नहीं आई, लेकिन उनके मोबाइल पर खाते से 10,000 रुपये डेबिट होने का मैसेज प्राप्त हुआ।
ग्राहक ने तुरंत बैंक को सूचना देकर ई-मेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई तथा पुलिस में भी आवेदन दिया, लेकिन बैंक की ओर से न तो समस्या का समाधान किया गया और न ही किसी नोटिस का जवाब दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने वकील के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में मामला दायर किया।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने एसबीआई के खिलाफ शिकायत नामंजूर करते हुए राष्ट्रीयकृत बैंक के खिलाफ शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार की और ग्राहक को मुआवजा व ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश जारी किया।
यह फैसला एटीएम लेनदेन में होने वाली तकनीकी त्रुटियों के मामलों में उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।



