
सूरत | केंद्र सरकार के फैसले से सूरत के लाखों वीवर्स को राहत, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और कमी की आशंका टली
सूरत। कपड़ा उद्योग से जुड़े कारोबारियों और वीवर्स की लगातार की गई मांग आखिरकार सफल रही। केंद्र सरकार ने नायलॉन, विस्कोस और स्पैन्डेक्स यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी नहीं लगाने का फैसला किया है। इस निर्णय से सूरत के टेक्सटाइल उद्योग, विशेषकर वीवर्स और निटर्स को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से उद्योग जगत की ओर से यह आशंका जताई जा रही थी कि यदि इन आयातित यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई तो कच्चे माल के दाम बढ़ जाएंगे और इसका सीधा असर कपड़ा उत्पादन लागत पर पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) की उस सिफारिश को खारिज कर दिया है, जिसमें विभिन्न आयातित यार्न पर अतिरिक्त एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव था। सरकार ने टेक्सटाइल वैल्यू चेन और उद्योग के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। देश के सबसे बड़े मैनमेड टेक्सटाइल हब सूरत में नायलॉन, फिलामेंट, पॉलिएस्टर और अन्य स्पेशियलिटी यार्न का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। ऐसे में ड्यूटी लगने की स्थिति में कच्चा माल महंगा होने के साथ कपड़ा उत्पादन लागत भी बढ़ जाती।
सरकार के इस फैसले से छोटे और मध्यम स्तर के वीविंग यूनिट्स तथा हाईस्पीड लूम संचालकों को सीधा लाभ मिलेगा। अब उन्हें वैश्विक गुणवत्ता वाला यार्न वाजिब कीमत पर उपलब्ध हो सकेगा, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों को मजबूती मिलेगी।
सचिन इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसायटी के सचिव मयूर गोलवाला ने कहा कि नायलॉन FDY पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव को केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा खारिज किया जाना सूरत के नायलॉन और टेक्सटाइल उद्योग के लिए राहतभरा निर्णय है। उन्होंने बताया कि सूरत के वीवर्स और निटर्स संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय वित्त मंत्री, टेक्सटाइल सचिव और टेक्सटाइल कमिश्नर के समक्ष की गई प्रस्तुतियां रंग लाई हैं। उन्होंने इसे वीवर्स के हित में मोदी सरकार का स्वागतयोग्य फैसला बताया।




