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गंभीर आरोपों के बीच मलाड जैन देरासर में भारी हंगामा, जैन मुनि को जबरन सांसारिक जीवन में भेजा गया

मुंबई। मुंबई के मलाड पूर्व स्थित देवकरण जगवल्लभ पार्श्वनाथ संघ में शनिवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब जैन मुनि नम्रवल्लभ के खिलाफ लंबे समय से लग रहे गंभीर आरोपों को लेकर बड़ी संख्या में जैन श्रावक देरासर में एकत्र हो गए। करीब तीन घंटे तक चले विवाद और गरमागरम बहस के बाद आखिरकार मुनि नम्रवल्लभ को सांसारिक जीवन में वापस भेज दिया गया।

हालांकि आधिकारिक तौर पर उनकी बीमारी को इसका कारण बताया गया है, लेकिन समाज में इसे पूरे विवाद को शांत और दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि उन्हें सांसारिक जीवन में लौटाने का आदेश गच्छाधिपति की ओर से नहीं दिया गया, बल्कि उनके गुरु द्वारा जारी पत्र में बीमारी के इलाज का हवाला दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद, सूरत, नासिक और मुंबई सहित कई शहरों से बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग देरसार पहुंचे थे। मुनि नम्रवल्लभ के खिलाफ आर्थिक लेन-देन, महिलाओं से जुड़े मामलों, बाहर का भोजन करने तथा कंदमूल सेवन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के चलते श्रद्धालुओं ने उन्हें तत्काल संयम जीवन से अलग करने की मांग तेज कर दी थी।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि संघ में करीब तीन घंटे तक जोरदार बहस और हंगामा चलता रहा। इस दौरान मुनि नम्रवल्लभ के गुरु आचार्य दर्शनवल्लभ ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया। बताया जाता है कि माहौल इतना गरमा गया था कि एक समय वह स्वयं भी आक्रामक हो गए और एक श्रावक पर नाराजगी जाहिर की। मौके पर आचार्य जगवल्लभ, मुनि चारित्र्यवल्लभ उर्फ हर्षवल्लभ सहित अन्य साधु भी उपस्थित थे।

लंबी चर्चा और विवाद के बाद मुनि नम्रवल्लभ ने अपना “ओघो” गुरु को सौंप दिया और सांसारिक जीवन में लौटने पर सहमति जताई। इसके बाद मामला शांत हुआ। शाम को उनके पिता राकेश आर. शाह (पंडितजी) नासिक से मलाड पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए।

सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी मुनि नम्रवल्लभ को प्रायश्चित स्वरूप अन्य गुरु के पास भेजा गया था, लेकिन वह एक सप्ताह के भीतर ही वापस अपने गुरु आचार्य दर्शनवल्लभ के पास लौट आए थे। बाद में उन्हें दोबारा दूसरे गुरु के पास भेजा गया, लेकिन वहां भी वह ज्यादा समय नहीं रुके और कुछ दिनों में लौट आए।

बताया जा रहा है कि अहमदाबाद, नडियाद, वांसदा, नागपुर समेत कई स्थानों पर पहले भी उनके खिलाफ शिकायतें और आरोप सामने आए थे। सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष नवंबर में गच्छाधिपति आचार्य राजेंद्रसूरि महाराज को भी मुनि नम्रवल्लभ के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जानकारी दे दी गई थी।

विवाद के बीच एक पत्र भी वायरल हुआ है, जिसे मुनि नम्रवल्लभ के पिता को लिखा गया बताया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि मुनि पिछले दो वर्षों से भगंदर बीमारी से पीड़ित हैं और संयम जीवन की मर्यादाओं के कारण उपचार में कठिनाई आ रही है। इसी वजह से उन्हें इलाज के लिए अस्थायी रूप से सांसारिक जीवन में भेजा जा रहा है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्वस्थ होने के बाद वह भविष्य में पुनः संयम जीवन अपना सकते हैं। इस पत्र पर उनके गुरु आचार्य दर्शनवल्लभ के हस्ताक्षर होने की भी बात कही जा रही है।

हालांकि समाज के कई लोगों का दावा है कि वास्तव में मुनि को भगंदर जैसी कोई गंभीर बीमारी नहीं है और बीमारी का हवाला केवल पूरे विवाद को दबाने के लिए दिया गया है। गौरतलब है कि पत्र में उनके खिलाफ लगे किसी भी आरोप का उल्लेख नहीं किया गया है।

जानकारी के अनुसार, ऐसे मामलों की शिकायतें प्रवर समिति के पास की जाती हैं। समिति के आचार्य विजय अभयदेवसूरिजी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके संघ के साधु मोक्ष महाराज ने फोन रिसीव करते हुए कहा कि किसी साधु को सांसारिक जीवन में भेजने का निर्णय संबंधित समुदाय के गच्छाधिपति द्वारा ही लिया जाता है।

मुनि नम्रवल्लभ भूवनभानुसूरि समुदाय से जुड़े थे। इस समुदाय के गच्छाधिपति आचार्य राजेंद्रसूरि महाराज की ओर से भी इस मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई। वहीं मुनि नम्रवल्लभ के गुरु आचार्य दर्शनवल्लभ महाराज की ओर से भेजे गए संदेशों का भी कोई जवाब नहीं मिला।

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