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सूरत में जैन संतों का मंगल प्रवेश, धर्ममय जीवन का दिया संदेश

सूरत। जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है कि प. पू. पन्यास प्रवर श्री भद्रंकरविजयजी महाराज के प्रशिष्यरत्न, विद्वद्वर्य प. पू. मुनिराज श्री धुरंधर विजयजी महाराज, प. पू. आचार्य भगवंत श्री मनमोहनसूरीश्वरजी महाराज, प. पू. आचार्य भगवंत श्री हेमप्रभ सूरीश्वरजी महाराज एवं आचार्य भगवंत श्री जयधर्म सूरीश्वरजी महाराज सहित लगभग 40 संतों का संघ पहली बार सूरत नगरी में पधारा है।
पूज्य संतों का आगमन आज वेसु स्थित राम विहार, वेसु तपागच्छ जैन संघ के शांता प्रभा कमलाबा आराधना भवन में हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भावपूर्वक स्वागत किया।
यह संत संघ केवल 7 दिनों के अल्प प्रवास पर सूरत पधारा है। पूज्य संत साधु-साध्वीजी भगवंतों की वैयावच्च (सेवा) के प्रति अत्यंत गहरी भावना रखते हैं। उनकी प्रेरणा एवं आशीर्वाद से पालिताणा में कस्तूर धाम तथा अहमदाबाद में मैत्री वात्सल्य धाम जैसी संस्थाएं सेवा और साधना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं।
इस अवसर पर परम पूज्य विद्वान व्याख्याता श्री धुरंधर विजयजी महाराज ने उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए धर्ममय जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने प्रभु की वाणी के माध्यम से संयम, सेवा और सदाचार के महत्व को सरल एवं प्रभावी शब्दों में समझाया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने पूज्य संतों के दर्शन एवं प्रवचन का लाभ प्राप्त किया।

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