सीता-राम विवाह प्रसंग और आदर्श गृहस्थ जीवन की भावपूर्ण व्याख्या
भव्य श्रीराम कथा के छठे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

सूरत। शहर में आयोजित भव्य श्रीराम कथा के छठे दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा वाचन पूज्य संत कृपाराम महाराज के श्रीमुख से हुआ। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीराम के सीता-राम विवाह प्रसंग का अत्यंत विस्तारपूर्वक एवं भावनात्मक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथा के दौरान महाराज ने जनकपुर में आयोजित सीता-राम विवाह की दिव्य लीला का सुंदर चित्रण करते हुए बताया कि यह विवाह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि मर्यादा, संयम, त्याग और सामाजिक आदर्शों की स्थापना का प्रतीक है। भगवान श्रीराम ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा ही जीवन का सबसे बड़ा आभूषण है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम का गृहस्थ जीवन आज के समाज के लिए एक आदर्श है। माता-पिता, गुरुजनों, भाई-बहनों और पत्नी के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन उन्होंने पूर्ण मर्यादा के साथ किया। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी धर्म, संस्कार और संयम के मार्ग पर चला जा सकता है।

महाराज ने आगे कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से क्रोध, अहंकार, लोभ और ईर्ष्या जैसे दुर्गुणों को त्यागकर सत्य, करुणा, सेवा और प्रेम जैसे सद्गुणों को अपनाना चाहिए। सद्गुणों के माध्यम से ही व्यक्ति भगवान के निकट पहुंच सकता है।
गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। गुरु ही अज्ञान के अंधकार से ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। भगवान श्रीराम स्वयं गुरु वशिष्ठ के आदर्श शिष्य रहे, जिससे गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व स्पष्ट होता है।
कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आनंद का वातावरण बना रहा। भजन-कीर्तन और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूज्य कृपाराम महाराज के प्रवचनों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
श्रीराम कथा का यह आयोजन सूरत में निरंतर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर समाज को संस्कार, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रह





