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चेक बाउंस पर नए नियम लागू: MSME व छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत — चम्पालाल बोथरा

देशभर के व्यापारिक समुदाय, विशेषकर MSME एवं छोटे व्यापारियों के लिए केंद्र सरकार ने चेक-बाउंस से जुड़ी जटिलताओं को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2025 से लागू हुए ‘Cheque Bounce Rules 2025’ को कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापारी हितकारी सुधार बताया है।CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा कि ये परिवर्तन भुगतान अनुशासन, व्यापारिक विश्वास और पूँजी सुरक्षा के लिए बेहद सकारात्मक साबित होंगे। उन्होंने बताया कि नये नियमों से व्यापारियों को त्वरित न्याय मिलेगा और चेक बाउंस मामलों में अनावश्यक देरी कम होगी।

नए नियमों के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—
* जेल व दोगुना जुर्माना: यदि चेक जानबूझकर या लापरवाही से बाउंस होता है, तो आरोपी को अधिकतम दो वर्ष की जेल तथा चेक राशि के दोगुने तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
* ऑनलाइन शिकायत सुविधा: अब चेक बाउंस की शिकायत पूरी तरह ऑनलाइन दर्ज होगी। इससे छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
* डिजिटल सबूत मान्य: SMS, ई-मेल, बैंक अलर्ट सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अब अदालत में वैध प्रमाण माने जाएंगे, जिससे फर्जी बहानों पर अंकुश लगेगा।
* समय-सीमा तीन महीने: शिकायत दर्ज करने की समय-सीमा एक महीने से बढ़ाकर तीन महीने कर दी गई है, जिससे पीड़ित व्यापारी को पर्याप्त समय मिल सके।
* बैंक खाता फ्रीज़ प्रावधान: लगातार तीन चेक बाउंस होने पर संबंधित बैंक खाता अस्थायी रूप से फ्रीज़ किया जा सकता है या चेक-बुक सुविधा रोकी जा सकती है।

श्री बोथरा ने कहा कि इन नियमों से व्यापारियों की लंबे समय तक फँसी पूँजी की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी और संपूर्ण व्यापारिक वातावरण में भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने सरकार व बैंकिंग संस्थानों से आग्रह किया कि इन प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि वास्तविक लाभ देशभर के व्यापारियों तक पहुँच सके।उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में डिजिटल भुगतान विवादों—जैसे UPI, NEFT, RTGS—के समाधान के लिए भी ऐसी ही सरल और त्वरित प्रक्रिया लागू की जानी चाहिए।CAIT, उन्होंने कहा, आगे भी व्यापारिक समुदाय की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाता रहेगा और आवश्यक नीति सुधारों के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।

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