रामलीला में विभीषण शरणागति, रामेश्वरम की स्थापना की लीला का हुआ मंचन

सूरत। वेसू के रामलीला मैदान पर चल रही रामलीला में सोमवार को विभीषण शरणागति, सेतुबंध रामेश्वरम की स्थापना का मंचन किया गया।
श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट के अध्यक्ष रतन गोयल, मंत्री अनिल अग्रवाल ने रामलीला प्रसंग के बारे में बताया कि माता सीता की खोज करने गए पवन पुत्र हनुमान अपनी तलाश पूरी कर वापस प्रभु श्री राम के पास पहुंचते हैं और विस्तार से माता सीता की ओर से कहे गए कथन तथा पूरे प्रसंग का वर्णन करते हैं। दूसरी ओर विभीषण के राम भक्ति से नाराज रावण उनको देश निकाला का फरमान सुनाता है। इसी बीच विभीषण पहुंचता है और अपनी पूरी बात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के समक्ष रखकर दास बनाने की अनुहार करता है।
मर्यादा के प्रतीक राम उसको गले लगा लेते हैं और अपनी शरण में ले लेते हैं। माता सीता के रावण की नगरी लंका में होने की जानकारी के बाद वानर सेना के साथ राम लंका के लिए रवाना होते हैं। अगले दृश्य में वानर सेना के साथ राम लक्ष्मण समुद्र के किनारे खड़े हैं। वह समुद्र से पार जाने की प्रार्थना करते हैं। डरा हुआ समुद्र राम के समक्ष प्रकट होता है और क्षमा प्रार्थना करता है। साथ ही समुद्र पार करने की जुगत भी बताता है। इसके बाद राम समुद्र तट पर ही देवाधिदेव भगवान शंकर का पूजन कर रामेश्वरम की स्थापना करते हैं। प्रभु की लीला का मंचन देखने शहर के गणमान्य महानुभावों एवं संतो ने श्री राम जी को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया ट्रस्ट ने आगंतुकों का उपर्णा भेट कर सम्मान किया ।
आज मंगलवार 30 सितंबर को रामलीला में अंगद रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन होगा।



