अनुभव के आलोक से आलोकित बुजूर्ग — साध्वीश्री उदितयशा
दादा-दादी चित्त समाधि शिविर, चेन्नई में समायोजित

चेन्नई। साहूकारपेट स्थित तेरापंथ भवन में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा साध्वीश्री उदितयशाजी ठाणा-4 के सान्निध्य में 65 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के श्रावक-श्राविकाओं हेतु “दादा-दादी चित्त समाधि शिविर” आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र एवं तीर्थंकर स्तुति से हुआ। सभाध्यक्ष अशोक खतंग ने स्वागत किया।
“बीती ताहि विसार दे, आगे की सुधि लेई” विषय पर प्रवचन में साध्वीश्री उदितयशाजी ने कहा कि बुजुर्ग अनुभव के आलोक से आलोकित होते हैं। छोटे चाहे कितने ही ज्ञानवान हों, पर माता-पिता व दादा-दादी का आशीर्वाद सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने में सहायक बनता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के कार्यों में हस्तक्षेप न करते हुए बुजुर्ग अपने अनुभव व प्रेमपूर्ण शब्दों से मार्गदर्शन दें। अध्यात्म से जीवन को भावित कर स्वर्ग समान बना सकते हैं और संयमपूर्ण जीवन से मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

साध्वी संगीतप्रभाजी ने कहा कि जीवन का संध्याकाल आत्मरंजन का समय है। इस अवस्था में त्याग, संयम और आत्मचिंतन से जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। सांसारिक उलझनों से मुक्त होकर विवेक के सहारे उज्ज्वल भविष्य रचा जा सकता है। साध्वी भव्ययशाजी ने सहज संयम और आत्मिक रिसोर्ट का संदेश देते हुए प्रायोगिक प्रयोग करवाए। उन्होंने साध्वी शिक्षाप्रभाजी संग भावपूर्ण गीत भी प्रस्तुत किया।
शिविर संयोजक सम्पतराजजी चोरड़िया ने बताया कि इसमें लगभग 180 श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। कई ऐसे बुजुर्ग भी आए जो सामान्यतः घर से बाहर नहीं निकलते, पर परिजनों के सहयोग से साध्वीवृन्द से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने पहुंचे। उन्होंने पिछले 23 वर्षों से इस शिविर की परंपरा और महत्व भी साझा किया। मंत्री गजेन्द्र खांटेड ने आभार व्यक्त किया। शिविर मंगल पाठ श्रवण के साथ संपन्न हुआ।
समाचार सम्प्रेषक : स्वरूप चन्द दाँती




