शांतिदूत के दर्शनार्थ पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद
समतामय होता है साधुता का जीवन : आचार्य महाश्रमण

– चतुर्दशी पर हुआ हाजरी वाचन कार्यकम
– अणुविभा के राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ
06.09.2025, शनिवार, कोबा, गांधीनगर।अहिंसा यात्रा प्रणेता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने दर्शन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य प्रवर का अहमदाबाद चातुर्मास अपने आध्यात्मिक आयामों ने समाज एवं राष्ट्र को एक नई आध्यात्मिक प्रेरणा देते हुए आगे बढ़ रहा है। गत दिनों में गृह मंत्री श्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री, सांसद आदि गुरुदेव के सान्निध्य में मार्ग दर्शन प्राप्त करने पहुंचे है।
पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में आज चतुर्दशी के अवसर पर हाजरी का आयोजन हुआ। प्रत्येक चतुर्दशी को आचार्य प्रवर चतुर्विध धर्म परिषद में मर्यादा पत्र का वाचन करते है। साधु साध्वियों द्वारा मर्यादा स्वीकरण एवं नवदीक्षित चारित्रआत्माओं द्वारा लेखपत्र का वाचन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना।

प्रवचन सभा में परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कहा – कर्मवाद में हिंसा व राग-द्वेष से बचने की बात होती है। व्यक्ति जिस प्रकार का कर्म करता है उस अनुरूप उसे फल भी भुगतना पड़ता है। जैसी करणी, वैसी भरणी, यह कर्मवाद का सार है। आदमी के अच्छे कार्य का अच्छा परिणाम व बूरे काम का बूरा परिणाम होता है। साधुओं के तो समस्त पाप कर्मों का त्याग रहता है। साधु की जीवन चर्या अहिंसामय होती है। चलते, बैठते, बात करते समय यहां तक कि चिंतन में भी अहिंसा होती है। कभी कोई दूसरा व्यक्ति बुरा करदे तो भी साधु समता की भावना भीतर में रखे। यह साधुता का जीवन है। अभी नवदीक्षित साधु साध्वियां है वह इन बातों का विशेष ध्यान रखे। हर कार्य में जागरूकता रहे। और जितना हो सके आगम स्वाध्याय चले। यह समय अध्ययन का है। इंद्रियों का आवश्यक उपयोग न हो। हर क्रिया के साथ संयम रहे। इंद्रियों का संयम, मन का संयम रखे। मन रूपी घोड़े की लगाम हाथ में रखे।

तत्पश्चात गुरुदेव ने मर्यादा पत्र का वाचन करते हुए कहा कि आचार्य भिक्षु ने न्याय, संविभाग, समभाव वृद्धि, पारस्परिक प्रेम, कलह निवारण और संघ की सुव्यवस्थाओं के लिए मर्यादा पत्र का निर्माण किया। नवदीक्षित साधु साध्वियों एवं समणी वृंद ने लेख पत्र का वाचन किया। गुरूदेव ने सभी को 21-21 कल्याणक बक्शीश रूप में प्रदान किए। मुख्यमुनि श्री महावीर कुमार जी ने विचारों की अभिव्यक्ति दी।

आज के समारोह में अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के 76 वें राष्ट्रीय अधिवेशन के मंचीय कार्यक्रम का आयोजन हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रताप दुगड़, महामंत्री मनोज सिंघवी ने वक्तव्य दिया। अणुव्रत के पदाधिकारियों ने समूह गीत का संगान किया।



