गुजरातसामाजिक/ धार्मिकसूरत सिटी
तप से मन स्थिर और आत्मा उज्ज्वल बनती है-आचार्य जिनमणिप्रभसूरीश्वर
तपस्या से शरीर स्वस्थ और निर्मल बनता है-खरतरगच्छाधिपति

खरतरगच्छ संघ में 400 से अधिक तपस्वियों का सामुहिक पारणा सम्पन्न
500 तपस्वियों का तपअनुमोदनार्थ वरघोड़ा निकलेगा
500 तपस्वियों का तपअनुमोदनार्थ वरघोड़ा निकलेगा
कुशल वाटिका में संघ स्वामीवात्साल्य का होगा आयोजन
बाड़मेर 28 अगस्त। कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड स्थित सुधर्मा प्रवचन वाटिका में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास कमेटी द्वारा संघ शास्ता वर्षावास 2025 के चातुर्मास के दौरान खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. की पावन निश्रा व बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुत्प्रभाश्री व श्रमण-श्रमणीवृन्द के पावन सानिध्य में पर्युषण पर्व के समापन पर गुरूवार को 411 तपस्वियों का पारणा सम्पन्न हुआ। तपस्वियों के पारणे के दौरान खरतरगच्छाधिपति ने तपस्वियों को तप का महत्व बताते हुए कहा कि तप जीवन को निर्मल बनाता है क्योंकि इससे चित्त-शुद्धि होती है, जिससे मन स्थिर और आत्मा उज्ज्वल बनती है, तन-मन के रोग मिटते हैं, और आध्यात्मिक विकास होता है. यह संस्कारों का जागरण करता है और आत्मा को प्रकाशवान बनाकर सामर्थ्यवान बनाता है। आचार्यश्री ने कहा तपश्चर्या से चित्त की शुद्धि होती है, जिससे मन शांत और स्थिर होता है और संस्कार शुद्ध होते हैं। तप केवल शारीरिक कष्ट नहीं है, बल्कि यह आत्मा का परिष्कार है, जिससे आत्मा उज्ज्वल और शुद्ध बनती है। तप से प्राप्त ऊर्जा का संरक्षण होता है, जिससे व्यक्ति सामर्थ्यवान बनता है और अपने भीतर की शक्ति को समझता है। तप के माध्यम से हमारे भीतर के सोए हुए संस्कार जागृत होते हैं, जो आध्यात्मिक विकास को गति देते हैं। तप इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने में मदद करता है, जिससे मन पर नियंत्रण बढ़ता है और जीवन निर्मल बनता है। तप से तन और मन के सभी रोग मिटते हैं, जिससे शरीर स्वस्थ और निर्मल बनता है। शक्ति बड़ी, तप से काया निर्मल बन जाती है। चातुर्मास कमेटी के सचिव बाबुलाल बोथरा हेमरत्न व मीडिया संयोजक कपिल मालू ने बताया कि खरतरगच्छ की राजधानी बाड़मेर नगर में खरतरगच्छाधिपतिजी की पावन निश्रा में बाड़मेर नगर में 41 वर्ष बाद चातुर्मास होने पर गुरूदेव की वाणी पर हर घर अठठाई घर अठठाई का आहवान कारगार साबित हुआ, जिसमें बाड़मेर में क 51 उपवास, 41 उपवास, 31 उपवास, 30 उपवास मासक्षमण, 21 उपवास, सिद्धितप व अट्ठाई तक के 411 तपस्वियों का पारणा गुरूवार को सुधर्मा प्रवचन वाटिका में सम्पन्न हुआ, जिसमें मुनि मधुरप्रभसागरजी म.सा. के 8 उपवास व साध्वी अपूर्वरूचि श्रीजी म.सा. के सिद्धितप की तपस्या सम्पन्न हुई उनका भी पारणा सम्पन्न हुआ। पर्युषण पर्व के समापन पर चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष अशोक धारीवाल ने सभी को धन्यवाद देते हुए सभी के सहयोग का आभार जताया।
बाड़मेर 28 अगस्त। कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड स्थित सुधर्मा प्रवचन वाटिका में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास कमेटी द्वारा संघ शास्ता वर्षावास 2025 के चातुर्मास के दौरान खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. की पावन निश्रा व बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुत्प्रभाश्री व श्रमण-श्रमणीवृन्द के पावन सानिध्य में पर्युषण पर्व के समापन पर गुरूवार को 411 तपस्वियों का पारणा सम्पन्न हुआ। तपस्वियों के पारणे के दौरान खरतरगच्छाधिपति ने तपस्वियों को तप का महत्व बताते हुए कहा कि तप जीवन को निर्मल बनाता है क्योंकि इससे चित्त-शुद्धि होती है, जिससे मन स्थिर और आत्मा उज्ज्वल बनती है, तन-मन के रोग मिटते हैं, और आध्यात्मिक विकास होता है. यह संस्कारों का जागरण करता है और आत्मा को प्रकाशवान बनाकर सामर्थ्यवान बनाता है। आचार्यश्री ने कहा तपश्चर्या से चित्त की शुद्धि होती है, जिससे मन शांत और स्थिर होता है और संस्कार शुद्ध होते हैं। तप केवल शारीरिक कष्ट नहीं है, बल्कि यह आत्मा का परिष्कार है, जिससे आत्मा उज्ज्वल और शुद्ध बनती है। तप से प्राप्त ऊर्जा का संरक्षण होता है, जिससे व्यक्ति सामर्थ्यवान बनता है और अपने भीतर की शक्ति को समझता है। तप के माध्यम से हमारे भीतर के सोए हुए संस्कार जागृत होते हैं, जो आध्यात्मिक विकास को गति देते हैं। तप इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने में मदद करता है, जिससे मन पर नियंत्रण बढ़ता है और जीवन निर्मल बनता है। तप से तन और मन के सभी रोग मिटते हैं, जिससे शरीर स्वस्थ और निर्मल बनता है। शक्ति बड़ी, तप से काया निर्मल बन जाती है। चातुर्मास कमेटी के सचिव बाबुलाल बोथरा हेमरत्न व मीडिया संयोजक कपिल मालू ने बताया कि खरतरगच्छ की राजधानी बाड़मेर नगर में खरतरगच्छाधिपतिजी की पावन निश्रा में बाड़मेर नगर में 41 वर्ष बाद चातुर्मास होने पर गुरूदेव की वाणी पर हर घर अठठाई घर अठठाई का आहवान कारगार साबित हुआ, जिसमें बाड़मेर में क 51 उपवास, 41 उपवास, 31 उपवास, 30 उपवास मासक्षमण, 21 उपवास, सिद्धितप व अट्ठाई तक के 411 तपस्वियों का पारणा गुरूवार को सुधर्मा प्रवचन वाटिका में सम्पन्न हुआ, जिसमें मुनि मधुरप्रभसागरजी म.सा. के 8 उपवास व साध्वी अपूर्वरूचि श्रीजी म.सा. के सिद्धितप की तपस्या सम्पन्न हुई उनका भी पारणा सम्पन्न हुआ। पर्युषण पर्व के समापन पर चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष अशोक धारीवाल ने सभी को धन्यवाद देते हुए सभी के सहयोग का आभार जताया।

500 तपस्वियों का भव्य वरघोड़ा आज निकलेगा-चातुर्मास कमेटी के ट्रस्टी पवन छाजेड़ ठकोणी व सम्पतराज नाहटा ने बताया कि चातुर्मास कमेटी के तत्वावधान में शुक्रवार को केयुप भवन मोक्ष मार्ग से खरतरगच्छाधिपति की निश्रा व बहिन म.सा. आदि ठाणा के पावन सानिध्य में प्रातः 08.00 बजे सकल जैन समाज के 500 तपस्वियों का भव्य वरघोड़ा निकलेगा। ठकोणी ने बताया कि वरघोड़े में हाथी, घोड़ा बघी, टेक्टर पर तपस्वियों का सामुहिक ऐतिहासिक वरघोड़ा निकलेगा, जो केयुप भवन से रवाना होकर पीपली चैक, जवाहर चैक, छोटी ढाणी, प्रतापजी पोल, करमुजी की गली, स्कूल नम्बर 04 से होता हुआ वापस कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड पहुंचेगा, जहां पर 51 उपवास, 41 उपवास व 30 उपवास मासक्षमण के तपस्वियों का बहुमान श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ चातुर्मास कमेटी द्वारा किया जायेगा। इसके तत्पश्चात 11.00 बजे से जैन श्री संघ की आज्ञा से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ चातुर्मास कमेटी द्वारा कुशल वाटिका में संघ स्वामीवात्साल्य का आयोजन किया गया है, जिसमें सम्पूर्ण जैन समाज का स्नेह भोज कुशल वाटिका में होगा।



