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जॉबवर्क कराने वालों के लिए ITC-04 अनिवार्य, फिर भी नियमों को लेकर असमंजस

GST स्क्रूटिनी और ऑडिट में ITC-04 नहीं भरने वाले व्यापारियों पर 50 हजार तक जुर्माना

सूरत। जीएसटी लागू होने के बाद जॉबवर्क कराने वाले व्यापारियों के लिए आईटीसी-04 रिटर्न भरना अनिवार्य होने के बावजूद बड़ी संख्या में व्यापारी यह फॉर्म नहीं भर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें भारी जुर्माना भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में चल रही जीएसटी स्क्रूटिनी और ऑडिट प्रक्रिया के दौरान विभागीय अधिकारी सबसे पहले यह जांच कर रहे हैं कि संबंधित व्यापारी ने जॉबवर्क कराया है या नहीं। जांच में आईटीसी-04 दाखिल नहीं पाए जाने पर व्यापारियों से अधिकतम 50 हजार रुपये तक का दंड वसूला जा रहा है।
आय पर असर नहीं, केवल जानकारी के लिए रिटर्न
व्यापारियों के अनुसार आईटीसी-04 भरने से सरकार की आय में न तो कोई लाभ होता है और न ही नुकसान, बल्कि इसका उद्देश्य केवल यह जानना है कि किसी कपड़े या माल पर कितनी बार जॉबवर्क हुआ है। वर्ष 2019 तक व्यापारियों के विरोध के चलते विभाग द्वारा इस नियम पर सख्ती नहीं बरती गई थी, लेकिन अब जीएसटी ऑडिट और स्क्रूटिनी में विशेष रूप से आईटीसी-04 पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। नियम के तहत अधिकारियों को अधिकतम 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने की अनुमति है, जिसके कारण अधिकांश मामलों में सीधे अधिकतम दंड ही लगाया जा रहा है, जिससे व्यापारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
जटिल नियमों से फॉर्म भरना व्यापारियों के लिए मुश्किल
व्यापारियों का कहना है कि वे आईटीसी-04 भरने के लिए तैयार हैं, लेकिन फॉर्म में मांगी जाने वाली विस्तृत जानकारी अत्यंत जटिल है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी व्यापारी ने 1000 मीटर कपड़ा जॉबवर्क के लिए भेजा तो प्रत्येक बार माल भेजने और वापस आने पर अलग-अलग चालान तैयार करना पड़ता है। जॉबवर्क से आंशिक रूप से वापस आए माल के लिए भी अलग चालान बनाना अनिवार्य होने से व्यापारियों का काफी समय दस्तावेजी प्रक्रिया में ही व्यतीत हो जाता है। इसी जटिलता के कारण कई व्यापारी आईटीसी-04 दाखिल करने से बचते हैं।
जुर्माना केवल नकद जमा करने का प्रावधान
पांच करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले व्यापारियों को वर्ष में एक बार तथा पांच करोड़ से अधिक टर्नओवर वालों को वर्ष में दो बार आईटीसी-04 रिटर्न दाखिल करना होता है। रिटर्न दाखिल नहीं करने पर लगाया जाने वाला 50 हजार रुपये तक का जुर्माना जीएसटी क्रेडिट से समायोजित नहीं किया जा सकता और इसे नकद रूप में बैंक चालान के माध्यम से जमा करना अनिवार्य है। इससे व्यापारियों को अतिरिक्त समय और आर्थिक बोझ दोनों झेलने पड़ते हैं, जिसका सबसे अधिक असर छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है।
ITC-04 नियम पर पुनर्विचार की मांग
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि जब इस रिटर्न से राजस्व पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता, तब व्यापारियों को अनावश्यक अनुपालन बोझ से मुक्त किया जाना चाहिए। वर्षों से आईटीसी-04 व्यवस्था समाप्त या सरल करने की मांग उठती रही है। व्यापारियों का मानना है कि सरकार यदि इस नियम पर पुनर्विचार करे तो छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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