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अपने भीतर सत्य का शोध करें : आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा.

अवध संगरीला बलेश्वर, सूरत।आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि व्यक्ति को अपनी दृष्टि बदलनी चाहिए। घर में कभी-कभी छोटी-छोटी बातों को लेकर अहंकार के कारण झगड़ा हो जाता है। इसलिए अपनी दृष्टि परिवर्तन कर छोटी बातों को गौण कर देना चाहिए। भगवान महावीर का सिद्धांत ‘‘परस्परोपग्रहो जीवानाम’’ सारा संसार एक दूसरे के सहयोग से चलता है। परिवार, समाज, देश एक दूसरे के सहयोग से चलता है। जहां आवश्यकता होती वहां एक दूसरे का सहयोग लिया जाता है। घर में कोई बीमार पड़ जाता है तो शरीर की साता के लिए दूसरे का सहयोग लिया जाता है।


उन्होंने यह भी फरमाया कि रतन टाटा जैसे व्यक्ति ने देश के लिए 80 प्रतिशत सम्पति दान कर दी। लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेता जो संयम पूर्वक जीवन जीने वाले ईमानदार नेता थे जिनके पास केवल दो जोड़ी कपड़े थे, इतने बड़े पद पर होते हुए भी वे सादगी पूर्वक रहे। इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति में ईमानदारी, सादगी महत्त्वपूर्ण है और ऐसा जीवन जीने वाले व्यक्ति प्रेरणास्रोत होते हैं।
उन्होंने फरमाया कि भगवान महावीर का सिद्धांत है कि अपने भीतर से सत्य का शोधन करें। पर्युषण पर्व के दौरान भगवान की वाणी का उद्घोष भीतर से हुआ, जो महत्त्वपूर्ण था, जिसका लाभ देश-विदेश में बैठे श्रद्धालुओं ने लिया।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने फरमाया कि एक साधु को गुण ग्रहण करना चाहिए। अगुणों को छोड़ देना चाहिए। आत्मा को आत्मा से समझने वाला सद्गुणों को पूर्णतया धारण करने से साधु होता है।
युवामनिषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ‘‘ऐसा वर दो मुझको प्रभु, मेरा जीवन हो निर्मल’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।
नवदीक्षित शूचित मुनि जी महाराज नेे 11 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किये। सचिन से श्रीमती चंचल देवी परेशकुमार पिछोलिया ने 27 उपवास एवं सुश्री भावना रोशनजी भटेवरा ने 9 उपवास का प्रत्याख्यान लिया, तपस्वियों का मोमेन्टो, शॉल, माला द्वारा सम्मान किया।पनवेल (महाराष्ट्र), जीरा (पंजाब), चैन्नई, मुंबई, के श्रद्धालुगण दर्शन हेतु उपस्थित हुए।

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