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जीवन में आत्म कल्याण के लिए समय निकालें, वही असली कमाई है-आचार्य श्री डॉ.शिव मुनि

आत्म भवन, बलेश्वर, सूरत।आज आत्म भवन में आयोजित धर्मसभा में आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन में कोई न कोई लक्ष्य होता है-जैसे चिकित्सक का लक्ष्य रोगियों को स्वस्थ करना, व्यापारी का लक्ष्य लाभ कमाना, विद्यार्थी का लक्ष्य अच्छे अंक लाना और गृहणी का लक्ष्य परिवार की सेवा करना होता है। लेकिन इसी जीवन में आत्मिक विकास का लक्ष्य भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गृहणियां रसोई के माध्यम से साधु-संतों और अतिथियों को शुद्ध भोजन कराकर पुण्य का संचय कर सकती हैं।

आचार्यश्री ने समझाया कि जीवन में साधु-संतों की सेवा का विशेष महत्व है। यात्रा के दौरान साधु को देखकर जल व आहार देने से व्यक्ति अपने अशुभ कर्मों की निर्जरा कर सकता है और पुण्य का भागी बनता है।

उदाहरण देते हुए आचार्य भगवंत ने कहा-जैसे सुबह का सूरज आकर्षक होता है, दोपहर में तेज हो जाता है और शाम को अस्त हो जाता है, वैसे ही जीवन में बचपन,जवानी और बुढ़ापा आते हैं। इस नश्वर शरीर पर अभिमान नहीं करना चाहिए। जब तक शरीर स्वस्थ है, इंद्रियां सक्रिय हैं, धर्म आराधना करनी चाहिए। धर्म का अर्थ है -आत्मा में स्थित होना, अपने स्वरूप को पहचानना। संसार के लिए समय निकालते हो,तो आत्मा के कल्याण के लिए भी समय निकालो,यही सच्ची पूंजी है।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने कहा कि अपनी आत्मा पर श्रद्धा रखो। इस शरीर को तपस्या से तपाओ। बाह्य और आभ्यंतर तप से मन व इंद्रियों पर संयम संभव है। यदि मन और इंद्रियों को खुला छोड़ दिया जाए तो वे भटकने लगती हैं। इन्हें स्वाध्याय और ध्यान द्वारा नियंत्रित करें।

युवा मनीषी, मधुर गायक श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने “पायो जी मैंने आत्म दर्शन पायो” भजन की सुंदर प्रस्तुति दी, जिससे संपूर्ण सभा भक्ति में लीन हो गई।

धर्मसभा में तपस्वियों ने तपस्या का प्रत्याख्यान किया। त्रिकमनगर से श्रीमती रतनबेन मांगीलाल मांडोत ने 14 उपवास, श्री कान्तीलाल भोगर ने 12 उपवास तथा सचिन से श्रीमती स्वीटी संजय कुमार गन्ना ने 9 उपवास का प्रत्याख्यान किया। मुंबई से ऑनलाइन जुड़कर 16 वर्षीय नमन हितेश मेहता ने 11 उपवास का प्रत्याख्यान लिया।

आज की धर्मसभा में राजपुरा, लुधियाना सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और प्रवचन लाभ लिया।

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