
गांधीनगर। गुजरात में रक्तदान जैसी महापुण्य और जीवनदायी सेवा पर स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही भारी पड़ती दिखाई दे रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान राज्य में 85 हजार से अधिक यूनिट रक्त ब्लड बैंकों में ही नष्ट हो गया। यह स्थिति तब है, जब कई मरीज और दुर्घटना पीड़ित समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण परेशान होते हैं।
11.86 लाख यूनिट रक्त संग्रह, लेकिन हजारों यूनिट नहीं पहुंचा मरीजों तक
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में गुजरात में 11,86,978 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। इनमें से 85 हजार से अधिक यूनिट विभिन्न कारणों से मरीजों के उपयोग में नहीं आ सके और नष्ट करने पड़े। इससे ब्लड बैंक प्रबंधन और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
संक्रमित रक्त और एक्सपायरी बने सबसे बड़े कारण
रिपोर्ट में बताया गया है कि रक्त खराब होने के प्रमुख कारणों में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, सिफिलिस और मलेरिया जैसे संक्रमण पाए जाने पर रक्त को नष्ट करना शामिल है। इसके अलावा ब्लड बैंकों के बीच समुचित समन्वय नहीं होने से बड़ी मात्रा में रक्त समय पर उपयोग नहीं हो सका और 35 से 42 दिन की समय सीमा पूरी होने के बाद एक्सपायर होकर नष्ट करना पड़ा।
हजारों रक्तदाताओं की सेवा भावना पर फिरा पानी
रक्त संग्रहण और भंडारण के दौरान बैग लीक होना, तापमान नियंत्रण में कमी तथा अन्य तकनीकी खामियों के कारण भी हजारों यूनिट रक्त बर्बाद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर समन्वय, आधुनिक प्रबंधन और प्रभावी निगरानी से इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। रिपोर्ट ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।



