सत्संग से ही मिलता है विवेक, सकारात्मक सोच से जीवन बनता है सफल : संत भागीरथराम शास्त्री

सूरत। चातुर्मास के पावन अवसर पर सुथार समाज द्वारा आयोजित सत्संग में व्यासपीठ से संत भागीरथराम शास्त्री ने भक्त शिरोमणि मीराबाई के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई”। सत्संग के माध्यम से ही मनुष्य को विवेक प्राप्त होता है और सकारात्मक सोच अपनाकर वह जीवन में सफलता एवं आध्यात्मिक उन्नति हासिल कर सकता है।
उन्होंने नकारात्मक और सकारात्मक विचारों के अंतर को समझाते हुए कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्ति के जीवन को नई दिशा देता है तथा उसे कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आयोजकों ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 से 7:30 बजे तक योग एवं प्राणायाम तथा दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक भक्त चरित कथा एवं प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक कार्यक्रम 22 सितंबर तक चलेगा, जिसमें सभी सनातन धर्मावलंबियों को सादर आमंत्रित किया गया है।



