वामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु सूरत। श्री रामायण प्रचार मण्डल उधना सूरत द्वारा आशा नगर, उधना में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार 20 मई को कथा वाचक संदीप महाराज ने भगवान वामन अवतार एवं श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। संदीप महाराज ने बताया कि भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन चरण भूमि का दान मांगा। संकल्प के बाद भगवान ने एक चरण में पृथ्वी लोक और दूसरे चरण में स्वर्ग लोक नाप लिया। तीसरे चरण के लिए स्थान पूछने पर राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। महाराज ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेकर उन्हें अमर यश प्रदान करते हैं। इसके बाद श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि कंस द्वारा देवकी की सात संतानों की हत्या के बाद कारागार में आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भगवान के जन्म लेते ही कारागार के ताले स्वतः खुल गए और सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव जी श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार कर वृंदावन पहुंचे। यमुना महारानी ने भगवान के चरण स्पर्श कर मार्ग दिया। नंद बाबा के घर यशोदा मैया के पास बालक कृष्ण को सुलाकर वासुदेव जी कन्या को लेकर वापस मथुरा लौट आए। कंस द्वारा कन्या को मारने का प्रयास करने पर वह आकाश में प्रकट होकर बोली कि तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है। कथा के अंत में “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
वामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

सूरत। श्री रामायण प्रचार मण्डल उधना सूरत द्वारा आशा नगर, उधना में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार 20 मई को कथा वाचक संदीप महाराज ने भगवान वामन अवतार एवं श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
संदीप महाराज ने बताया कि भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन चरण भूमि का दान मांगा। संकल्प के बाद भगवान ने एक चरण में पृथ्वी लोक और दूसरे चरण में स्वर्ग लोक नाप लिया। तीसरे चरण के लिए स्थान पूछने पर राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। महाराज ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेकर उन्हें अमर यश प्रदान करते हैं।
इसके बाद श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि कंस द्वारा देवकी की सात संतानों की हत्या के बाद कारागार में आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भगवान के जन्म लेते ही कारागार के ताले स्वतः खुल गए और सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव जी श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार कर वृंदावन पहुंचे। यमुना महारानी ने भगवान के चरण स्पर्श कर मार्ग दिया। नंद बाबा के घर यशोदा मैया के पास बालक कृष्ण को सुलाकर वासुदेव जी कन्या को लेकर वापस मथुरा लौट आए। कंस द्वारा कन्या को मारने का प्रयास करने पर वह आकाश में प्रकट होकर बोली कि तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है।
कथा के अंत में “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
सूरत। श्री रामायण प्रचार मण्डल उधना सूरत द्वारा आशा नगर, उधना में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार 20 मई को कथा वाचक संदीप महाराज ने भगवान वामन अवतार एवं श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
संदीप महाराज ने बताया कि भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन चरण भूमि का दान मांगा। संकल्प के बाद भगवान ने एक चरण में पृथ्वी लोक और दूसरे चरण में स्वर्ग लोक नाप लिया। तीसरे चरण के लिए स्थान पूछने पर राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। महाराज ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेकर उन्हें अमर यश प्रदान करते हैं।
इसके बाद श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि कंस द्वारा देवकी की सात संतानों की हत्या के बाद कारागार में आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भगवान के जन्म लेते ही कारागार के ताले स्वतः खुल गए और सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव जी श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार कर वृंदावन पहुंचे। यमुना महारानी ने भगवान के चरण स्पर्श कर मार्ग दिया। नंद बाबा के घर यशोदा मैया के पास बालक कृष्ण को सुलाकर वासुदेव जी कन्या को लेकर वापस मथुरा लौट आए। कंस द्वारा कन्या को मारने का प्रयास करने पर वह आकाश में प्रकट होकर बोली कि तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है।
कथा के अंत में “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।




