धर्मसामाजिक/ धार्मिक

5 भाई-बहनों ने किया सामूहिक पारणा, अक्षय तृतीया पर वर्षीतप महोत्सव आयोजित

सिरियारी-आचार्य श्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान के नवनिर्मित भिक्षु ऑडिटोरियम में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर वर्षीतप पारणा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शासन श्री मुनि श्री मुनिव्रतजी स्वामी के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार महामंत्र के उच्चारण एवं “ऋषभाय नमः” के सामूहिक जप के साथ हुई। संस्थान के अध्यक्ष श्री निर्मल श्री श्रीमाल ने उपस्थित तपस्वियों एवं श्रद्धालु भाई-बहनों का स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर मुनि श्री मुनिव्रतजी स्वामी ने भगवान ऋषभदेव के युग का वर्णन करते हुए उनके आदर्श जीवन पर प्रकाश डाला। वहीं मुनि श्री चैतन्य कुमार “अमन” ने कहा कि भगवान ऋषभ कर्मयुग और धर्मयुग के आदिकर्ता थे। उन्होंने पहले गृहस्थ जीवन के कर्तव्यों का निर्वहन किया और बाद में साधना मार्ग अपनाकर समाज को धर्मपथ पर अग्रसर किया।
उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मानव जीवन में शांति और सुरक्षा के लिए तीर्थंकरों, अवतारों और महापुरुषों के आदर्शों को अपनाना आवश्यक है। आत्मिक विकास के लिए इंद्रियों एवं भौतिक पदार्थों पर नियंत्रण ही सच्चा समाधान है।
महोत्सव के दौरान पांच भाई-बहनों द्वारा सामूहिक रूप से वर्षीतप का पारणा किया गया, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। इस अवसर पर श्रीमती गुलाबदेवी का 24वां, श्रीमती कमलादेवी का 18वां, श्रीमती केसरदेवी का 4था तथा श्रीमती अपेक्षाबेन एवं श्री बाबूलालजी पितलिया का प्रथम वर्षीतप पूर्ण हुआ।
तपस्वियों के सम्मान में उनके परिजनों ने अपने भाव व्यक्त किए। अंत में सभी तपस्वियों को प्रतीक चिन्ह, साहित्य एवं दुपट्टा भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में श्री नरेन्द्र जैन, पंकज हिरण एवं अभिषेक दूगड़ ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन संस्थान के उपाध्यक्ष श्री उत्तमचंदजी सुखलेचा ने किया।

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