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150 साल पुरानी उधारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अहमदाबाद के मस्कती कपड़ा मार्केट में लागू होगा क्रेडिट इंश्योरेंस

हर साल 500 से अधिक भुगतान विवादों के बीच पहल, पार्टी के भागने या दिवालिया होने पर 60 दिन में मिलेगा बीमा क्लेम; अब साख नहीं, क्रेडिट स्कोर तय करेगा उधारी की सीमा

अहमदाबाद। अहमदाबाद के 150 वर्ष पुराने कपड़ा व्यापार में एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। वर्षों से केवल आपसी विश्वास और उधारी के आधार पर होने वाले व्यापार को अब क्रेडिट इंश्योरेंस (बीमा) का सुरक्षा कवच मिलने वाला है। मस्कती कपड़ा मार्केट महाजन ने गुजरात में पहली बार ऐसी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे व्यापारियों को भुगतान अटकने, खरीदार के फरार होने या दिवालिया होने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

महाजन के सचिव संदीप शाह एवं कमेटी सदस्य विभिन्न बीमा कंपनियों के साथ मिलकर इस व्यवस्था का प्रारूप तैयार कर रहे हैं। नई प्रणाली के तहत व्यापारी खरीदार की व्यापारिक जानकारी, पैन और क्रेडिट हिस्ट्री बीमा कंपनी को उपलब्ध कराएंगे। इसके आधार पर खरीदार की क्रेडिट लिमिट निर्धारित की जाएगी। निर्धारित सीमा तक किए गए व्यापार को बीमा सुरक्षा मिलेगी, जबकि उससे अधिक का व्यापार व्यापारी के स्वयं के जोखिम पर माना जाएगा।

यदि खरीदार पक्ष कारोबार बंद कर देता है, दिवालिया हो जाता है या भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो बीमा कंपनी अनुबंध की शर्तों के अनुसार व्यापारी को भुगतान करेगी। प्रस्तावित व्यवस्था में 60 दिनों के भीतर क्लेम राशि मिलने का प्रावधान रखा गया है। बड़े लेन-देन के मामलों में एक से अधिक बीमा कंपनियों से भी कवर लिया जा सकेगा।

मस्कती कपड़ा महाजन के अध्यक्ष गौरांग भगत ने बताया कि यह केवल मौखिक समझौता नहीं होगा, बल्कि कानूनी रूप से मजबूत अनुबंध तैयार किए जाएंगे। महाजन अपने विधि सलाहकारों की मदद से विभिन्न बीमा कंपनियों के साथ विस्तृत करार करेगा। इस प्रस्ताव को आगामी मैनेजिंग कमेटी की बैठक के एजेंडे में शामिल कर अंतिम मंजूरी दी जाएगी। साथ ही बीमा कंपनियों से लिखित गारंटी भी ली जाएगी, ताकि व्यापारियों के हित पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।

महाजन के अनुसार उधार में माल बेचने के बाद भुगतान नहीं मिलने की शिकायतों में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्तमान में महाजन की लवाद समिति के पास प्रतिवर्ष 500 से अधिक शिकायतें पहुंच रही हैं, जिनमें करोड़ों रुपये की राशि फंसी हुई है। कई मामलों में पुलिस शिकायतें भी दर्ज करानी पड़ती हैं। ऐसे में व्यापारियों को सुरक्षित और निश्चिंत वातावरण में कारोबार करने की सुविधा देने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है, जिसे कपड़ा व्यापार जगत में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

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