
सूरत। चेक अनादरण (चेक बाउंस) के एक महत्वपूर्ण मामले में न्यायालय ने रतन मार्केट स्थित ज्योति एजेंसी के प्रोपराइटर श्रीजीत राजन चेट्टियोरोड़ी को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने आरोपी को फरियादी नरेश मेहता को देय 5 लाख रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार निर्धारित समयावधि में भुगतान नहीं होने पर आरोपी को अतिरिक्त तीन माह का कारावास भुगतना होगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी द्वारा बार-बार भुगतान की मांग किए जाने पर आरोपी ने भविष्य दिनांकित चेक जारी किए थे, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर भुगतान रोक दिए जाने के कारण चेक अनादृत हो गए। इसके बाद फरियादी ने निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत न्यायालय में वाद दायर किया।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों एवं फरियादी पक्ष के अधिवक्ता प्रतीक शर्मा की दलीलों पर विचार करते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय का यह फैसला व्यापारिक लेन-देन में विश्वास, पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही की महत्ता को रेखांकित करने वाला माना जा रहा है।
फरियादी नरेश मेहता का आरोप है कि यह मामला केवल एक चेक बाउंस तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक विश्वास के दुरुपयोग का भी उदाहरण है। उनके अनुसार कई व्यापारियों को भी भुगतान संबंधी विवादों और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। उन्होंने प्रभावित व्यापारियों से अपने अनुभव और तथ्यों को उचित मंचों पर रखने की अपील की है, ताकि व्यापारिक समुदाय में जवाबदेही और विश्वास को और अधिक मजबूत किया जा सके।
व्यापारिक जगत में इस निर्णय को एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि वित्तीय अनुशासन और वचनबद्धता का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई प्रभावी रूप से जारी रहेगी।



