सूरत में जैन समाज की आस्था का केंद्र गोपीपुरा की पहचान पुनर्जीवित करने का प्रयास
15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य बैठक, ऊर्जा भूमि उद्घाटन पर दान की सरवाणी
सूरत शहर का गौरव माने जाने वाला गोपीपुरा क्षेत्र केवल एक इलाका नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और इतिहास की जीवंत धरोहर के रूप में जाना जाता है। सदियों से आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह क्षेत्र जैन समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां आने वाले श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति का अनुभव होता है।
गोपीपुरा की इसी गौरवशाली पहचान को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से हाल ही में एक भव्य बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 15 हजार से अधिक श्रद्धालु, समाज के अग्रणी तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान निकली रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वहीं विभिन्न पाठशालाओं से 1500 से अधिक बच्चों ने आकर्षक वेशभूषा में भाग लेकर आयोजन को और भव्य बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान सहस्त्रफना दादा की पधारामणी, नृत्योत्सव और आनंदोत्सव का भी आयोजन किया गया। विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए तथा संगीत और आध्यात्मिक वातावरण से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बन गया।
कार्यक्रम के प्रथम चरण के आयोजन के लिए श्रावकों द्वारा उदारतापूर्वक दान दिया गया, जबकि श्राविकाओं द्वारा स्वर्ण दान भी किया गया। ऊर्जा भूमि के उद्घाटन के अवसर पर दान की सरवाणी बहती रही, जिससे समाज में उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
बैठक के दौरान गोपीपुरा क्षेत्र के विकास तथा धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए आगामी योजनाओं पर भी चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि गोपीपुरा क्षेत्र में कुल 44 जैन देरासर स्थित हैं, जो इसे शहर का एक विशिष्ट धार्मिक केंद्र बनाते हैं। इन देरासरों में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक गतिविधियां आयोजित होती हैं, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
इस आयोजन को जैन समाज द्वारा गोपीपुरा की पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



