
सूरत। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की राष्ट्रीय टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने केंद्र सरकार द्वारा पारित नए एमएसएमई संशोधन कानून का स्वागत करते हुए इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार बताया है। कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जितन राम मांझी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल को विस्तृत नीतिगत पत्र भेजकर टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र की व्यावहारिक समस्याओं से अवगत कराया है।
बोथरा ने कहा कि वर्तमान एमएसएमईडी अधिनियम में निर्धारित 45 दिनों की अधिकतम भुगतान अवधि टेक्सटाइल एवं गारमेंट उद्योग की लंबी और बहुस्तरीय सप्लाई चेन के अनुरूप कई मामलों में व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने लिखित समझौते के आधार पर भुगतान की अधिकतम अवधि 45 दिन से बढ़ाकर 75 दिन करने की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 75 दिन की सीमा भुगतान में देरी को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि अधिकतम संविदात्मक सीमा के रूप में हो। यदि खरीदार और विक्रेता 15, 30 या 45 दिन में भुगतान पर सहमत हैं तो भुगतान उसी अवधि में किया जाए।
कैट ने यह भी मांग की है कि भुगतान अवधि में बदलाव होने पर आयकर अधिनियम की धारा 43बी(एच) में भी आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि दोनों कानूनों में एकरूपता बनी रहे। साथ ही एमएसएमई और टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी दिशानिर्देश जारी करने का सुझाव दिया गया है।
बोथरा ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार टेक्सटाइल उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों और एमएसएमई हितों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए इन सुझावों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।



