पुरुषोत्तम मास सत्संग के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, महाराज डॉ. रामप्रसाद जी ने दिए आध्यात्मिक संदेश

सूरत। माहेश्वरी लक्जरिया परिवार एवं समस्त भक्तजन, सूरत द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित भव्य सत्संग के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर, जोधपुर के परमपूज्य परमहंस श्री 108 डॉ. रामप्रसाद जी महाराज के मुखारविंद से आयोजित सत्संग में हजारों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

अपने प्रेरणादायी प्रवचन में महाराज श्री ने कहा कि संसार में वास्तव में कुछ भी हमारा नहीं है, सब कुछ परमात्मा का है। मनुष्य को सदैव दूसरों की अच्छाइयों को ग्रहण करना चाहिए तथा बुराइयों को देखने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसा मनुष्य का अंतःकरण होता है, उसे संसार भी वैसा ही दिखाई देता है। इसलिए जीवन में सकारात्मक सोच, विनम्रता और सद्भाव का होना अत्यंत आवश्यक है।
महाराज श्री ने कहा कि अधिक बोलने की अपेक्षा मौन रहना अधिक कल्याणकारी है। मनुष्य को अहंकार, अभिमान और द्वेष का त्याग कर प्रेम, सहयोग और सौहार्द के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। भगवान के नाम के प्रति प्रेम और सच्ची भक्ति ही जीवन का वास्तविक आधार है। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है तथा परमात्मा हमारे भीतर ही विराजमान हैं, उन्हें बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं है।
इस अवसर पर महाराज श्री ने स्वर्ग की 29 सीढ़ियों का विस्तृत वर्णन करते हुए श्रोताओं को सदैव शुद्ध, सकारात्मक और पवित्र भाव रखने का संदेश दिया।

सत्संग के दौरान आस्था काव्या (सुपुत्री रेणु सोनी) ने अपनी मधुर भजन प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने “दुनिया चले ना श्रीराम के बिना, रामजी चले ना हनुमान के बिना” सहित अनेक भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में झूम उठे और नृत्य कर आनंद का अनुभव किया।
माहेश्वरी लक्जरिया परिवार के अध्यक्ष श्याम राठी ने भी भजन प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बनाया तथा कार्यक्रम में पधारे सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सत्संग प्रेमियों का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान एवं आशीर्वाद प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में के.एल. माहेश्वरी (सेवानिवृत्त आयकर मुख्य आयुक्त), हैदराबाद जिला माहेश्वरी सभा के मंत्री राजेश मालपानी, गौतम हालावाला सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
समाजसेवी महेश पुंगलिया व हरिकिशन राठी ने बताया कि सीमित समय में आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम की सफलता का मुख्य कारण भक्तों की महाराज श्री के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण रहा। उन्होंने महाराज श्री से प्रत्येक वर्ष तीन दिवसीय सत्संग के आयोजन हेतु पुनः सूरत पधारने का विनम्र निवेदन भी किया।
सत्संग के समापन के पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। भक्ति, आध्यात्मिकता और सद्भाव से परिपूर्ण इस आयोजन ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन पर अमिट छाप छोड़ी।




