
सूरत। एशिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल हब के रूप में प्रसिद्ध सूरत का कपड़ा उद्योग एक बार फिर कानूनी और व्यावसायिक संकट का सामना कर रहा है। विदेशों से आयात किया गया उच्च गुणवत्ता वाला स्पेशियलिटी यार्न मुंबई के न्हावा शेवा तथा सूरत के हजीरा बंदरगाह पर कस्टम विभाग द्वारा रोक दिए जाने से व्यापारियों की करोड़ों रुपये की पूंजी फंस गई है और बाजार में नकदी संकट गहरा गया है।
जानकारी के अनुसार, दोनों बंदरगाहों पर करीब 1000 कंटेनर यार्न के रोके गए हैं। इन कंटेनरों में चीन, वियतनाम और इंडोनेशिया से आयातित स्पेशियलिटी यार्न रखा हुआ है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 250 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। माल बंदरगाहों पर अटकने से व्यापारियों की कार्यशील पूंजी ब्लॉक हो गई है और उद्योग पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
बताया गया है कि केंद्र सरकार ने गत 11 नवंबर को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से स्थानीय उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विदेशी यार्न के आयात की अनुमति दी थी। हालांकि, देश की पांच बड़ी स्पिनिंग मिलों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की और एकतरफा स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लिया। व्यापारियों का आरोप है कि उनका पक्ष सुने बिना ही स्टे दिया गया, जिसके आधार पर कस्टम विभाग ने आयातित यार्न की निकासी रोक दी है।
व्यापारियों के अनुसार, उन्होंने कई महीने पहले ही करोड़ों रुपये का अग्रिम भुगतान और लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिया था। अब माल बंदरगाहों पर फंसे रहने से उन्हें प्रतिदिन लाखों रुपये का डेमरेज और डिटेंशन शुल्क चुकाना पड़ रहा है। उद्योग जगत का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उत्पादन प्रभावित होगा और हजारों श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यार्न कारोबार से जुड़े 15 से अधिक प्रमुख व्यापारियों ने साउदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स में अपनी चिंता और नाराजगी व्यक्त की। चैंबर के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि स्टे आदेश से पहले आयात किए गए माल को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र रिलीज कराने के लिए सरकार के समक्ष उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व किया जाएगा।




