
सूरत। सदर्न गुजरात चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) की अगुवाई में देशभर के मैन–मेड फाइबर (एमएमएफ) टेक्सटाइल से जुड़े प्रमुख एसोसिएशनों की जीएसटी दरों को लेकर ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल, साउदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन, मेटेक्सिल, एसआरटीईपीसी, नायलॉन स्पिनर्स एसोसिएशन, दिल्ली टेक्सटाइल एसोसिएशन, सिंथेटिक फाइबर इंडस्ट्री एसोसिएशन, पॉलिएस्टर टेक्सटाइल एंड अपेरल एसोसिएशन समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
उद्योगपतियों ने कहा कि यार्न के रॉ मटेरियल पर 18% जीएसटी यथावत रहने से बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) सरकार के पास अटका रहेगा, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और भारतीय स्पिनर्स वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाएंगे। अनुमान है कि प्रति किलो यार्न पर करीब 9 रुपये का जीएसटी क्रेडिट जमा रहेगा।
बैठक में यह मांग उठी कि पैराजायलिन, कैप्रोलैक्टम, MEG, PTA, नायलॉन और पॉलिएस्टर चिप जैसे कच्चे माल पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% की जाए, ताकि पूरी वैल्यू चेन में इन्वर्टेड ड्यूटी खत्म हो सके। उद्योगपतियों ने कहा कि यदि यह समस्या हल नहीं हुई तो टेक्सटाइल क्षेत्र में आवश्यक निवेश और निर्यात लक्ष्य प्रभावित होंगे।साथ ही, 2500 रुपये से अधिक के गारमेंट पर 18% जीएसटी लगाने का भी कड़ा विरोध हुआ। उद्योग जगत ने इसे घटाकर 5% करने की मांग की है।
इन मुद्दों को लेकर 12 सितम्बर को नई दिल्ली में राजस्व विभाग की बैठक में एसोसिएशन प्रतिनिधि टैक्स रिसर्च यूनिट के अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे




