वंदे भारत ट्रेन बनी जीवनदाता: सूरत सिविल के 96वें अंगदान से रचा गया इतिहास
पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस से पहुंचाया गया हृदय, चार मरीजों को मिला नया जीवन

सूरत। सूरत की नई सिविल अस्पताल में 96वां सफल अंगदान संपन्न हुआ। इस दौरान देश में पहली बार हृदय प्रत्यारोपण के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के माध्यम से हृदय अहमदाबाद भेजकर नया इतिहास रचा गया। किम क्षेत्र के पीपोदरा में एक फैक्ट्री में कार्यरत ओडिशा के 36 वर्षीय श्रमिक मिथुन लक्ष्मणभाई स्वैन के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके हृदय, लीवर और दोनों किडनी का दान किया गया, जिससे चार गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई को मिथुन स्वैन को अचानक लकवे (पैरालिसिस) का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में सूरत सिविल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान चिकित्सकों की टीम ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वयंसेवक इकबाल कड़ीवाला और काउंसलर निर्मला काथुडे ने परिजनों को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। पत्नी और भाई की सहमति मिलने के बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया।
शुक्रवार तड़के डॉक्टरों की टीम ने दोनों किडनी, लीवर और हृदय सुरक्षित निकाले। अहमदाबाद स्थित आईकेडीआरसी (IKDRC) की टीम ने किडनी और लीवर प्राप्त किए, जबकि हृदय को प्रत्यारोपण के लिए यू.एन. मेहता अस्पताल, अहमदाबाद भेजा गया। सूरत सिविल अस्पताल से रेलवे स्टेशन तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और वहां से वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए हृदय को मात्र ढाई घंटे में अहमदाबाद पहुंचाया गया, जहां सफलतापूर्वक हृदय प्रत्यारोपण किया गया।
इस ऐतिहासिक अंगदान प्रक्रिया के दौरान नई सिविल अस्पताल की अधीक्षक डॉ. पारुल वडगामा, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा संबंधित स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे। यह उपलब्धि न केवल सूरत बल्कि पूरे देश के अंगदान अभियान के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।



