Textile

यार्न के बेसिक कच्चे माल MEG में भारी उछाल, अगस्त की शुरुआत में ही टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ा दबाव

यार्न 4 से 8 रुपये प्रति किलो महंगा होने के संकेत, वीवर्स को बिना ऑर्डर उत्पादन से बचने की सलाह

सूरत। अगस्त महीने के पहले ही दिन टेक्सटाइल उद्योग के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। यार्न के प्रमुख कच्चे माल एमईजी (MEG) की कीमत में 11.60 रुपये प्रति किलो तथा पीटीए (PTA) के भाव में 2.40 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। उद्योग जगत का मानना है कि इस बढ़ोतरी का असर अगले सप्ताह से यार्न बाजार में दिखाई देगा और एफडीवाई (FDY), पीओवाई (POY) तथा डीटीवाई (DTY) समेत विभिन्न प्रकार के पॉलिएस्टर यार्न के दाम 4 से 8 रुपये प्रति किलो तक बढ़ सकते हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में ग्रे कपड़े और फिनिश्ड फैब्रिक की मांग अपेक्षा से काफी कमजोर है। ऐसे में यार्न महंगा होने से वीविंग उद्योग की उत्पादन लागत बढ़ेगी, जबकि तैयार कपड़े के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं। इससे वीवर्स के लाभांश पर सीधा असर पड़ेगा और कई इकाइयों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

कपड़ा बाजार में फिलहाल थोक और खुदरा व्यापारियों की खरीद शुरू तो हुई है, लेकिन मांग अभी भी सुस्त बनी हुई है। कम मार्जिन और धीमी बिक्री के कारण व्यापारी ऊंचे दाम पर ग्रे कपड़ा खरीदने से बच रहे हैं।

उद्योग जानकारों ने छोटे और मध्यम वीवर्स को सलाह दी है कि वे बिना ऑर्डर बड़े पैमाने पर उत्पादन न करें। जरूरत के अनुसार ही यार्न की खरीद करें और अनावश्यक स्टॉक जमा करने से बचें, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार होने पर कच्चे माल की कीमतों में फिर नरमी आ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ग्रे कपड़े के उचित भाव नहीं मिल रहे हैं तो 24 घंटे उत्पादन कर स्टॉक बढ़ाने के बजाय उत्पादन को नियंत्रित रखना अधिक लाभदायक होगा। साथ ही भुगतान चक्र को सुरक्षित बनाए रखने, उधारी पर सख्ती बरतने तथा केवल सुरक्षित भुगतान शर्तों पर ही माल की बिक्री करने की सलाह दी गई है।

उद्योग विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि सामान्य ग्रे कपड़े के बजाय वैल्यू एडेड फैब्रिक और फैंसी यार्न आधारित उत्पादों की ओर रुख करने से बढ़ती लागत के बावजूद बेहतर मार्जिन प्राप्त किया जा सकता है। उनका मानना है कि अगस्त की शुरुआत सूरत के टेक्सटाइल उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण है और मौजूदा परिस्थितियों में विवेकपूर्ण खरीद, नियंत्रित उत्पादन तथा मजबूत वित्तीय अनुशासन ही नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी उपाय होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button