
सूरत। 7 और 8 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश और खाड़ी के पानी से आई बाढ़ ने देश के सबसे बड़े टेक्सटाइल हब सूरत को गहरा आर्थिक झटका दिया है। बाढ़ के पानी ने शहर की 30 से अधिक टेक्सटाइल मार्केटों के बेसमेंट, दुकानों और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करोड़ों रुपये की संपत्ति और व्यापारिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ। हजारों कपड़ा व्यापारी आज भी इस आपदा से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मार्केटों के बेसमेंट में कई फीट तक पानी भर जाने से लिफ्ट, ट्रांसफार्मर, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, डीजी सेट, फायर फाइटिंग सिस्टम, पंप, पार्किंग क्षेत्र और अन्य आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। कई मार्केटों में डबल बेसमेंट होने के कारण कई दिनों तक पानी नहीं निकल सका, जिससे उपकरणों में जंग लगने और नुकसान का दायरा लगातार बढ़ता गया। मार्केट संचालकों के अनुसार प्रत्येक मार्केट को औसतन 20 से 30 लाख रुपये, जबकि समग्र रूप से करोड़ों रुपये की क्षति का अनुमान है। सामान्य जनजीवन बहाल होने के बावजूद अनेक मार्केटों में मरम्मत और पुनर्स्थापना का कार्य अब भी जारी है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए फेडरेशन ऑफ सूरत ट्रेड एंड टेक्सटाइल एसोसिएशन्स (फोस्टा) ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर तेजस परमार (आईएएस) को ज्ञापन सौंपकर बाढ़ प्रभावित कपड़ा व्यापारियों को राहत योजना का लाभ शीघ्र और सरल प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराने की मांग की। संस्था ने गुजरात सरकार द्वारा घोषित राहत पैकेज का स्वागत करते हुए आग्रह किया कि राहत योजना की पूरी जानकारी, आवश्यक दस्तावेजों की सूची और आवेदन प्रक्रिया प्रत्येक प्रभावित व्यापारी तक समय पर पहुंचाई जाए।
फोस्टा ने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया कि संस्था को राहत योजना के क्रियान्वयन में सहयोगी बनाया जाए, ताकि प्रभावित व्यापारियों तक सही जानकारी पहुंचे और उन्हें आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही फोस्टा कार्यालय में विशेष हेल्पडेस्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जहां व्यापारी राहत योजना के ऑनलाइन-ऑफलाइन आवेदन, दस्तावेजों की तैयारी और अन्य प्रक्रियाओं के लिए निःशुल्क मार्गदर्शन एवं सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
बाढ़ का असर केवल कपड़ा व्यापार तक सीमित नहीं रहा। टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े परिवहन व्यवसाय को भी बड़ा झटका लगा। माल से भरे कई टेम्पो पानी में डूब गए, जिससे वाहन मालिकों और चालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अधिकांश वाहनों का बीमा नहीं होने के कारण मरम्मत का पूरा खर्च उन्हें स्वयं वहन करना पड़ रहा है।
फोस्टा, मार्केट संचालकों, व्यापारियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार से मांग की है कि टेक्सटाइल मार्केटों और परिवहन क्षेत्र को भी राहत पैकेज में शामिल कर विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि सूरत के लाखों लोगों की आजीविका से जुड़े इस प्रमुख उद्योग को जल्द से जल्द फिर से गति मिल स




