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दुख में प्रभु का भजन ज्यादा होता है : पुष्कर दास महाराज

श्रीमद्भागवत कथा में कुंती माता और राजा परीक्षित के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन

सूरत। शहर के ग्रीन वैली अपार्टमेंट में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उदयपुर के कथा व्यास श्री पुष्कर दास महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सत्कर्म का महत्व बताते हुए कहा कि दुख के समय मनुष्य सबसे अधिक प्रभु का स्मरण करता है। उन्होंने कहा कि पाप के धन से अर्जित स्वर्ण में कलयुग का वास होता है, इसलिए सदैव धर्मपूर्वक अर्जित धन का ही सदुपयोग करना चाहिए।

कथा के दौरान महाराजश्री ने भगवान श्रीकृष्ण और कुंती माता के प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान द्वारका लौट रहे थे, तब कुंती माता ने सुख नहीं बल्कि दुख की कामना की थी, क्योंकि विपत्ति में मनुष्य का मन बार-बार भगवान की शरण में जाता है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख जीवन के दो पहलू हैं, इसलिए हर परिस्थिति में प्रभु भक्ति और सत्संग से जुड़े रहना चाहिए।

उन्होंने भीष्म पितामह के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि सच्ची भक्ति और धर्म पालन से अंत समय में भी भगवान का सान्निध्य प्राप्त होता है। वहीं राजा परीक्षित और कलयुग के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि कलयुग को स्वर्ण, जुआ, शराब और बाजारू स्त्री में स्थान मिला, इसलिए इन बुराइयों से दूर रहकर भगवान के नाम का स्मरण ही जीवन का कल्याण कर सकता है।

महाराजश्री ने बताया कि पाप के धन से प्राप्त मुकुट धारण करने के कारण राजा परीक्षित की बुद्धि भ्रष्ट हुई और उन्हें ऋषि पुत्र के श्राप का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने राजपाट त्यागकर शुक्रताल में शुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया।कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में आयोजक विट्ठल वैष्णव ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित की जा रही है।

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