
सूरत। करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में राजकोट के तीन व्यापारियों को राहत नहीं मिली। सूरत की सेशंस कोर्ट ने तीनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी गंभीर टिप्पणी की कि आरोपियों की ओर से मामले से जुड़े सभी पूर्व न्यायिक आदेश प्रस्तुत नहीं किए गए, बल्कि केवल अपने पक्ष में अनुकूल आदेश ही कोर्ट के समक्ष रखे गए।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता सुमितकुमार रामनिवास अग्रवाल ने अठवा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपियों ने मिलकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी महेश राजोलिया, इनविक्टस पॉलीपैक के पार्थ राजेश उजारिया तथा आरव इम्पेक्स के कुलदीप कोराटे ने अलग-अलग अग्रिम जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों का शिकायतकर्ता से कोई सीधा संपर्क नहीं था और पूरा लेन-देन कथित मुख्य सूत्रधार करण जगाणी के माध्यम से हुआ। उन्होंने इसे आपराधिक मामला नहीं बल्कि दीवानी (सिविल) प्रकृति का वित्तीय विवाद बताया।
वहीं, सरकार की ओर से लोक अभियोजक भरतसिंह चावड़ा ने जांच अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि आरोपियों ने करोड़ों रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी के लिए सुनियोजित आपराधिक साजिश रची थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सेशंस कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।




