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पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन से टेक्सटाइल कारोबार को नई गति की उम्मीद

‘डबल इंजन सरकार’ से सूरत–कोलकाता के 15,000 करोड़ रुपये के व्यापार को मिलेगा बल

सूरत। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन के बाद सूरत के टेक्सटाइल उद्योग जगत में नए उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है। उद्योगकारों का मानना है कि अब केंद्र और पश्चिम बंगाल दोनों स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने से नीति समन्वय मजबूत होगा और सूरत से कोलकाता तथा पूर्वी भारत तक फैला टेक्सटाइल व्यापार अधिक सुगम बनने की संभावना है।
व्यापारी संगठनों के अनुसार सूरत से कोलकाता और वहां से पूर्व भारत तक होने वाला टेक्सटाइल कारोबार प्रतिवर्ष लगभग 15,000 करोड़ रुपये का है। केवल दुर्गा पूजा सीजन में ही सूरत से कोलकाता के बाजारों में 450 से 500 करोड़ रुपये मूल्य की साड़ियां और ड्रेस मटेरियल की सप्लाई की जाती है। कोलकाता, सूरत के व्यापारियों के लिए बांग्लादेश निर्यात का प्रमुख केंद्र भी है, जहां से लगभग 700 से 800 व्यापारी व्यापार करते हैं और इसका वार्षिक मूल्य 1,200 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत और लंबे समय से सत्ता में रही ममता बनर्जी सरकार के अंत के बाद उद्योग जगत को नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। व्यापारियों का मानना है कि नई सरकार के गठन से नीतिगत फैसलों, परिवहन व्यवस्था तथा औद्योगिक माहौल में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
डबल इंजन सरकार से नीति समन्वय मजबूत
अब तक राज्य और केंद्र में अलग-अलग दलों की सरकार होने से कई योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय की कमी महसूस की जाती थी। उद्योगकारों का मानना है कि अब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार होने से ‘डबल इंजन’ व्यवस्था का लाभ मिलेगा। केंद्र की टेक्सटाइल नीति 2026-27 के तहत प्रस्तावित मेगा टेक्सटाइल पार्क और एमएमएफ सेक्टर को मिलने वाले प्रोत्साहन का अप्रत्यक्ष लाभ सूरत के सप्लायर्स को भी मिल सकता है।
सूरत–कोलकाता व्यापार: पूर्व और पश्चिम भारत की आर्थिक कड़ी
सूरत देश के कुल मानव निर्मित कपड़ा उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा तैयार करता है। यहां से हर वर्ष हजारों ट्रकों में ग्रे फैब्रिक, फिनिश्ड कपड़ा और साड़ियां कोलकाता के बड़े बाजारों तक भेजी जाती हैं। कोलकाता पूर्व भारत, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के लिए प्रमुख व्यापारिक प्रवेशद्वार होने के कारण सूरत के व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा ट्रेडिंग हब बना हुआ है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि राजनीतिक स्थिरता से पूर्वोत्तर राज्यों तक बाजार विस्तार की नई संभावनाएं खुलेंगी।
औद्योगिक निवेश और नई संभावनाएं
टेक्सटाइल उद्योग इस बदलाव को ‘नई शुरुआत’ के रूप में देख रहा है। पश्चिम बंगाल में निवेश बढ़ने और नई औद्योगिक नीति लागू होने की स्थिति में सूरत के कपड़ों की मांग बढ़ सकती है। हालांकि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया के तनाव के कारण कच्चे माल की कीमतों में 30-35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, फिर भी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार होने से परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। SITEX-2026 जैसे औद्योगिक प्रदर्शनों से पूर्वी बाजारों तक पहुंच और मजबूत होने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।
भुगतान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
सूरत के व्यापारियों के सामने लंबे समय से कोलकाता में अटके भुगतान और धोखाधड़ी के मामले बड़ी चुनौती बने हुए थे। व्यापार जगत का मानना है कि नई सरकार के गठन के बाद कानून-व्यवस्था में सुधार होने से व्यापारिक विश्वास बढ़ेगा और उधारी भुगतान की सुरक्षा मजबूत होगी।
व्यापारियों के अनुसार सूरत और कोलकाता के बीच टेक्सटाइल व्यापार केवल आर्थिक लेनदेन नहीं, बल्कि भारत के पश्चिम और पूर्व को जोड़ने वाली मजबूत औद्योगिक कड़ी है, जिसे अब नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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