
सूरत, 13 जून 2026। सूरत की 10वीं अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने वराछा पुलिस थाने में मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316 के तहत नामजद आरोपी मोहित अग्रवाल को कुछ शर्तों के अधीन नियमित जमानत प्रदान की है। यह मामला कपड़ा व्यापार से जुड़े लगभग 41.24 लाख रुपये के कथित धोखाधड़ी और विश्वासघात से संबंधित है, जिसमें शिकायतकर्ता ने पांच व्यापारियों पर उधार में माल लेकर भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया था।
मामले के शिकायतकर्ता संतोष कुमार पुत्र किशन लाहोटी, निवासी फ्लैट नंबर ए-902, मधुरम अपार्टमेंट, भटार चार रास्ता, सूरत तथा मूल निवासी गांव काकरा, थाना नौखा, जिला बीकानेर (राजस्थान) ने अपनी शिकायत में बताया कि वह पूर्व में सूरत के ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट स्थित दुकान नंबर 5488-89 में “बालाजी फैब्रिक्स” के नाम से कपड़े का व्यवसाय करते थे। यह फर्म उनकी पत्नी लक्ष्मीदेवी लाहोटी के नाम से संचालित होती थी।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने समय पर भुगतान करने का भरोसा देकर उधार में कपड़े का माल खरीदा और शुरुआत में विभिन्न बहाने बनाकर भुगतान टालते रहे। बाद में आरोपियों ने फोन उठाने बंद कर दिए, मोबाइल बंद कर दिए और संपर्क से बाहर हो गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी आरोपियों ने मिलकर उनके साथ विश्वासघात किया और कुल 41,24,009 रुपये का भुगतान नहीं किया।
शिकायत में ए.आर. एंटरप्राइज के मालिक राजेंद्र प्रसाद, निवासी शक्ति खंड-03, इंदिरापुरम, गाजियाबाद पर 11,28,705 रुपये, एम.के. ट्रेडर्स के मालिक मोहित अग्रवाल, निवासी महावीर मार्केट, प्रताप विहार, खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद पर 10,02,622 रुपये, आसी रिटेल के मालिक संदीप कुमार, निवासी गौतमबुद्ध नगर, नोएडा पर 4,19,775 रुपये, संदीप कुमार, निवासी जी.डी. कॉलोनी, मयूर विहार फेज-3, दिल्ली पर 10,69,721 रुपये तथा एम.एस. एंटरप्राइज के मालिक मनीष कुमार, निवासी चांद मोहल्ला, गांधी नगर, दिल्ली पर 5,03,900 रुपये की देनदारी का आरोप लगाया गया है।
जमानत सुनवाई के दौरान आरोपी मोहित अग्रवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विरल ए. मेहता ने अदालत में दलील दी कि मामला पूरी तरह व्यापारिक लेनदेन से जुड़ा वित्तीय विवाद है। उन्होंने कहा कि मोहित अग्रवाल ने शिकायतकर्ता से लगभग 17 लाख रुपये का माल खरीदा था, जिसमें से करीब 7 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था और लगभग 10 लाख रुपये की राशि शेष थी। केवल भुगतान बकाया रह जाने से आपराधिक धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, वह जांच में सहयोग कर रहा है तथा मामले में सभी साक्ष्य दस्तावेजी प्रकृति के हैं। ऐसे में पुलिस हिरासत की आवश्यकता नहीं है और न ही किसी बरामदगी अथवा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माननीय 10वीं अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने मोहित अग्रवाल को कुछ शर्तों के अधीन नियमित जमानत प्रदान कर दी। इस आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यापारिक लेनदेन से उत्पन्न वित्तीय विवादों को आपराधिक मामलों का स्वरूप देने से पहले उनके वास्तविक स्वरूप और तथ्यों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्णय ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।




