सूरत मनपा ने गंदे पानी को बनाया कमाई का जरिया, हर साल 150 करोड़ रुपये की आय
राजस्थान में सूरत मॉडल अपनाकर उद्योगों को उपलब्ध कराया जाए ट्रीटेड सीवरेज जल : श्याम राठी

सूरत। सूरत महानगर पालिका (एसएमसी) ने गंदे पानी के निस्तारण और उसके पुनर्चक्रण के क्षेत्र में देशभर के नगर निगमों के लिए एक मिसाल कायम की है। शहर के सीवेज को आधुनिक तकनीक से शुद्ध कर उद्योगों तक पहुंचाने की अभिनव व्यवस्था के जरिए मनपा न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही है, बल्कि हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व भी अर्जित कर रही है।
मनपा के अनुसार, सूरत शहर में 99 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र सीवरेज नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थापित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाता है। इसके बाद टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) में इस पानी को औद्योगिक उपयोग के अनुरूप तैयार किया जाता है।
शुद्ध किए गए इस पानी की आपूर्ति पांडेसरा, सचिन और पलसाना स्थित औद्योगिक इकाइयों, विशेष रूप से टेक्सटाइल उद्योगों को पाइपलाइन के माध्यम से की जाती है। इससे उद्योगों को वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध होता है और ताप्ती नदी के मीठे पानी पर निर्भरता भी कम होती है।
एसएमसी को इस परियोजना से हर वर्ष लगभग 140 से 150 करोड़ रुपये की आय हो रही है। मनपा द्वारा शुरू की गई इस पहल से अब तक 557 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त किया जा चुका है। इसके अलावा निर्माण कार्यों के लिए भी टैंकरों के माध्यम से उपचारित पानी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे अतिरिक्त आय अर्जित होती है।शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मनपा के जल शोधन संयंत्र भी लगातार कार्यरत हैं, जिससे घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
भविष्य की योजनाओं के तहत एसएमसी ने वर्ष 2035 तक शहर के 100 प्रतिशत अपशिष्ट जल के उपचार और पुनर्चक्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस योजना के पूर्ण होने पर मनपा की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 450 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।गंदे पानी को ‘वेस्ट’ नहीं बल्कि ‘वेल्थ’ में बदलने की सूरत की यह पहल न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो रही है, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में भी एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से राजस्थान फाउंडेशन सूरत चैप्टर की मुलाकात, उद्योग, जल प्रबंधन और परिवहन सुविधाओं पर हुई व्यापक चर्चा
जयपुर/सूरत। प्रवासी राजस्थानी दिवस सम्मेलन के दूसरे दिन राजस्थान फाउंडेशन के सूरत चैप्टर के अध्यक्ष श्याम राठी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुख्यमंत्री कार्यालय में सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। इस दौरान प्रवासी राजस्थानी समाज, औद्योगिक विकास, जल प्रबंधन, परिवहन सुविधाओं तथा राजस्थान और सूरत के आपसी संबंधों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रवासी राजस्थानी समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की प्रगति में प्रवासी भाइयों-बहनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार हमेशा प्रवासी बंधुओं के साथ खड़ी है। “आप एक कदम बढ़ाइए, हम चार कदम बढ़ाएंगे।” मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर में आयोजित प्रवासी राजस्थानी दिवस का भव्य आयोजन सरकार की इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
बैठक के दौरान श्याम राठी ने उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सूरत मॉडल अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि सूरत महानगरपालिका सीवरेज के पानी का सेकेंडरी और टर्शियरी ट्रीटमेंट कर उसे उद्योगों को उपलब्ध कराती है। इसी तर्ज पर जयपुर, जोधपुर, बालोतरा, पाली और भीलवाड़ा जैसे औद्योगिक शहरों में भी उपचारित सीवरेज जल उद्योगों को उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे उद्योगों को पानी की कमी से राहत मिलेगी और नगर निगमों को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
श्याम राठी ने तेजी से विकसित हो रहे सूरत के सोलर पैनल उद्योग का उल्लेख करते हुए सुझाव दिया कि सोलर पैनल निर्माता राजस्थान में अपनी इकाइयां स्थापित करें, जिससे राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा मिले और औद्योगिक विकास को गति प्राप्त हो।
उन्होंने परिवहन सुविधाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण मांगें रखीं। सूरत से जोधपुर के लिए नियमित हवाई सेवा शुरू करने तथा मुंबई से राजस्थान के विभिन्न शहरों के लिए नियमित रेल सेवाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि प्रवासी राजस्थानी समाज को आवागमन में सुविधा मिल सके।
सूरत चैप्टर के सचिव विक्रमसिंह शेखावत, कोषाध्यक्ष योगेंद्र शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने भी अपने सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए थे।
उल्लेखनीय है कि प्रवासी राजस्थानी दिवस कार्यक्रम में सूरत से लगभग 100 प्रवासी राजस्थानी बंधुओं ने भाग लिया था।
श्याम राठी ने कहा कि भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, पाली और बालोतरा जैसे शहरों को राजस्थान के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इन शहरों में सूरत की तर्ज पर सीवरेज जल का उपचार कर उद्योगों को उपलब्ध कराया जाए, जिससे उद्योगों की पानी की आवश्यकता पूरी हो सके और उत्पादन प्रभावित न हो।
गौरतलब है कि श्याम राठी महेश ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष हैं और रंगाई, छपाई, बुनाई तथा परिधान निर्माण से जुड़े अनेक उद्योगों का नेतृत्व कर रहे हैं।




