भारत में जल्द आ सकती हैं प्लास्टिक की करेंसी नोटें, RBI कर रहा तैयारी
बढ़ती नकदी मांग और नोट छपाई लागत के बीच बड़ा कदम

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट और UPI के बढ़ते चलन के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर प्लास्टिक यानी पॉलीमर बैंक नोटों को प्रचलन में लाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हाल ही में पटना और मुंबई में आयोजित RBI की केंद्रीय बोर्ड बैठकों में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई है तथा जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
RBI के सामने बढ़ती नकदी मांग के साथ-साथ नोटों की छपाई और रखरखाव का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में बैंक नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 5,101.4 करोड़ रुपये था। वहीं मई 2025 के मध्य तक देश में प्रचलन में कुल नकदी 42.86 ट्रिलियन रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 11.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक वर्ष में 23.8 अरब गंदे, कटे-फटे और क्षतिग्रस्त नोट बाजार से वापस लेने पड़े, जिनमें 500 रुपये के नोटों की संख्या सबसे अधिक रही। यही कारण है कि RBI अधिक टिकाऊ और सुरक्षित विकल्प के रूप में पॉलीमर नोटों पर विचार कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोट पारंपरिक कपास आधारित कागजी नोटों की तुलना में 2.5 से 4 गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। ये विशेष बाय-एक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म से तैयार किए जाते हैं, जिससे इन पर पानी, नमी, कीचड़ और बैक्टीरिया का असर नहीं होता। साथ ही इनमें अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स और विशेष स्याही का उपयोग किया जाता है, जिससे नकली नोट बनाना बेहद कठिन हो जाता है।
हालांकि पॉलीमर नोटों की प्रारंभिक छपाई लागत सामान्य नोटों की तुलना में अधिक होती है, लेकिन उनकी लंबी आयु के कारण दीर्घकाल में सरकार को हजारों करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
गौरतलब है कि RBI ने इससे पहले अक्टूबर 2009 में 10 रुपये के एक अरब पॉलीमर नोट जारी करने के लिए वैश्विक निविदा आमंत्रित की थी। इसके बाद वर्ष 2015-16 में मैसूर, शिमला, जयपुर, कोच्चि और भुवनेश्वर जैसे विभिन्न जलवायु वाले शहरों में इनके फील्ड ट्रायल की भी योजना बनाई गई थी। अब एक बार फिर पॉलीमर नोटों को लेकर गतिविधियां तेज होने से संकेत मिल रहे हैं कि भारत जल्द ही प्लास्टिक करेंसी के नए दौर में प्रवेश कर सकता है।



