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तप के साथ पारणे का भी है महत्त्व: आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के अमृत महोत्सव का हुआ शुभारम्भ

अक्षय तृतीया वर्षीतप पारणा महोत्सव पर श्रेयांस कुमार के लाभार्थी बने आशीष दिप्ती जैन

सूरत।अक्षय तृतीया का भव्य आयोजन तप सूर्य आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिव मुनि जी म.सा. के सान्निध्य में आयोजित हुआ। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विशेष रूप से श्वेताम्बर मूर्तिपूजक परम्परा के विजय वल्लभ समुदाय के गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्री नित्यानन्द सूरीश्वर जी म.सा. आदि ठाणा का विशेष मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ।

शिवाचार्य उद्बोधन – आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि आज अक्षय तृतीया का पावन दिवस व गुरु ज्ञान जन्म जयन्ती का अवसर है और आज से ही श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ अमृत महोत्सव वर्ष का भी शुभारम्भ हो रहा है और आज के इस अवसर पर गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्री नित्यानन्द सूरीश्वर जी म.सा. लम्बा विहार कर यहां एक दिन पहले ही इस पावन प्रसंग पर आए हैं। संत-महापुरुष अपनी पीड़ा नहीं देखते उनका जीवन परोपकार के लिए होता है। परम्परा अलग हो सकती है किंतु हम सब एक हैं और हम सभी भगवान महावीर के साधु हैं। गच्छाधिपतिजी के आने से समारोह में चार चांद लग गए। आपकी एक मुस्कुराहट सबको अपना बनाती है। हमारा पूर्व में अनेक बार मिलना हुआ अभी पौने दो वर्ष पूर्व ही आत्म भवन अवध संगरीला में मिलन हुआ था। आपने जिनशासन के अनेक रचनात्मक कार्य किये हैं।

इस अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ श्रमण परम्परा के संस्थापक थे। भगवान के साथ चार हजार राजाओं ने दीक्षा ग्रहण की। भगवान को दीक्षा के पश्चात् तेरह माह तक विधि अनुसार आहार प्राप्त नहीं हुआ। वे प्रतिदिन आहार के लिए जाते परन्तु कोई उन्हें स्वर्ण आभुषण, कन्या आदि भेंट करता। आहार सामग्री नहीं देता इस तरह लगभग 400 दिवस बीतने पर उनके ही प्रपौत्र श्रेयांस कुमार द्वारा उन्हें इक्षु रस प्राप्त हुआ। तभी से आहार दान की परम्परा प्रारम्भ हुई जो आज तक अक्षुण्ण रूप से चल रही है। अनेकों वर्ष बीत गये परन्तु अक्षय तृतीया अक्षय है। वर्षीतप करने वाले आराधकों से विशेष निवेदन है कि वे अपने तप में कोई दोष नहीं लगाये और सभी तपस्वी अपने वर्षीतप को निरंतर गतिमान रखे। नये लोग भी आज नये वर्षीतप का संकल्प ले सकते हैं।

आचार्य भगवन ने श्रमण संघ के 75वें वर्ष में प्रवेश पर फरमाया कि हमारा यह श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ अनेक भव्यात्माओं के निस्वार्थ त्याग का फल है। 22 सम्प्रदाय के आचार्यों ने अपने आचार्य पद का त्याग कर एक आचार्य, एक समाचारी के भाव सामने रखते हुए श्रमण संघ की स्थापना की। इस स्थापना में श्री ऑल इण्डिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेन्स का बहुमूल्य योगदान है। श्रमण संघ आज अपने 74 वर्ष पूर्ण कर 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। जैन कॉन्फ्रेंस के तत्वावधान में इसका अमृत महोत्सव आयोजन सादड़ी की पुण्य धरा पर होना संभावित है।

युवाचार्य श्री मधुकर मुनि जी महाराज के मुझे दर्शन नहीं हुए परन्तु उन्होंने आगम बत्तीसी पर एक विशाल कार्य किया। आज राज गुरुमाता उमराव कंवर जी महाराज अर्चना की सुशिष्याएं राजस्थान प्रवर्तिनी डॉ. सुप्रभाजी म.सा. सुधाजी भी पधारे हैं।

आचार्यश्री जी ने इस अवसर पर गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्री नित्यानन्द सूरीश्वर जी म.सा., राजस्थान प्रवर्तिनी आर्या डॉ. सुप्रभाजी, महासाध्वी विजयलता जी को आदर की चादर भेंट की।

नित्यानन्द उद्बोधन – गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्री नित्यानन्द सूरीश्वर जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि आज का कार्यक्रम एक त्रिवेणी संगम है, जहां पर अक्षय तृतीया, श्रमण संघ स्थापना दिवस एवं गुरु ज्ञान मुनि जी का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। जिस तरह से स्वर्ण के मल को दूर करने की शक्ति अग्नि में है, जल मिश्रित दूध को अलग करने की शक्ति हंस के चोंच में रही हुई है उसी तरह आत्मा में लगे हुए कर्मों को अलग करने की शक्ति तप में रही हुई है। आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. पिछले 41 वर्षों से अखण्ड वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने शरीर को महत्त्व न देते हुए आत्म साधना को महत्त्व दिया। अनेक बार स्वास्थ्य की प्रतिकूलता होने पर भी उनका वर्षीतप अखण्ड रहा है। यह अपने आपमें बहुत ही महत्त्वपूर्ण है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं है। इस कलयुग में सच्ची साधना और साधुता के दर्शन आचार्य श्री शिवमुनि जी म.सा. में होते हैं जिनकी समता, करुणा और मैत्री की सुवास सभी जीवों पर समान रूप से बरस रही है।

हम तो लंबे-लंबे विहार करते हुए राजस्थान से गुजरात होते हुए मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं और आगे पूणे, हुबली होते हुए चातुर्मास हेतु बैंगलोर पहुंचना हैं, लेकिन जैसे ही आचार्य श्री के वर्षीतप पारणे का समाचार मिला मैंने तभी तय कर लिया कि उस अवसर पर मुझे उपस्थित होना ही है भले कितना ही विहार करना पड़े, प्रवचन के दौरान उन्होंने श्रमण संघ के स्थापना दिवस एवं आचार्य श्री जी के गुरुदेव श्री ज्ञानमुनि जी म.सा. के जन्मोत्सव पर भी प्रकाश डाला। समस्त वर्षीतप आराधकों की वर्षीतप आराधना की अनुमोदना करते हुए उन्होंने सभी को तप मार्ग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उन्होंने गुरु वल्लभ समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति के नाते आचार्यश्री जी को सम्पूर्ण समुदाय की ओर आदर की चादर भेंट की।

इसी महोत्सव में पारणा करने वाले अनेक मुनियों व महासाध्वीवृंद का जिक्र करते हुए उन्होंने अपने शिष्य मुनि श्री परमानन्द विजयजी महाराज के चतुर्थ वर्षीतप के पारणे पर आशीर्वाद देते हुए उनकी शांति और समता की भी अनुमोदना की।

विमोचन – अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आचार्य श्री आत्मारामजी महाराज द्वारा टीकाकृत श्री अनुत्तरोतपातिक सूत्र – तृतीय संस्करण, श्री उत्तराध्ययन सूत्र पद्यमय संस्करण अनुवाद स्वाध्यायी धर्मीचन्द चोपड़ा, अंतर्मन के स्वर-निशांत मुनि भजन संकलन, प्रमाद से प्रमोद – गुरुभक्त श्री अतुल जैन आदि ग्रंथों व पुस्तकों का विमोचन किया गया। श्रमण संघ अमृत महोत्सव के लोगो (प्रतीक) का भी लोकार्पण हुआ।

श्रमण संघ जैन पंचाग मोबाईल एण्ड्रोेइड एप्लीकेशन का भी लोकार्पण किया गया।

प्रारंभ में युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा., प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा. ने भजन की प्रस्तुति दी। राजस्थान प्रवृर्तिनी महासाध्वी डॉ. श्री सुप्रभाजी म.सा., महासाध्वी संयमप्रभा जी म.सा., महासाध्वी श्री विजयलता जी म.सा. ने उद्गार व्यक्त किये। इस अवसर पर महासाध्वी चेतना जी आदि ठाणा, साध्वी विश्ववंदना जी आदि ठाणा, साध्वी श्री विश्वासश्री जी म.सा. आदि ठाणा, साध्वी वैभवश्री जी आदि ठाणा, महासाध्वी प्रतिज्ञाजी म.सा. आदि साध्वीवृंद विशेष रूप से उपस्थित थे।

इस अवसर पर वीतराग साधिका निशा जी ने वर्षीतप आराधकों को सम्पूर्ण वर्ष में तपस्या के अंतर्गत हुई भूलों के लिए अंतःकरण से आलोचना करवाई।  श्री ऑल इण्डिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेन्स राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अतुल जैन, महामंत्री श्री अमितराय जैन, श्री सुभाष ओस्तवाल, श्रावक समिति के महामंत्री श्री मुन्नालाल जैन ने अपने भाव प्रकट किये।

शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से श्री रवीन्द्रनाथ जैन, श्री रवीकान्त जैन, श्री राजपाल जैन श्री सुशील जैन, श्री रोहित जैन आदि ट्रस्टियों ने आचार्य भगवन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की एवं सफल आयोजन की व्यवस्था हेतु श्री जयन्तीभाई कुकड़ा, श्री आकाश मादरेचा, श्री मंजीत कोठारी, श्री विकास सिंघवी, श्री अमित मेहता, श्री गौतम मेहता, श्री विजय गन्ना, श्री गोपाल गन्ना आदि का स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मान किया।

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर देशभर से आए 165 वर्षीतप आराधकों व 18 साधु-साध्वीवृंद सहित कुल 183 पारणे आचार्य भगवन के सान्निध्य में सम्पन्न हुए।

इस अवसर पर मुंबई से नेशनल एडवरटाईजिंग एवं मान एल्यूमिनियम लि. के श्री आशीष दीप्ति जैन ने श्रेंयास कुमार के लाभार्थी बनकर आचार्य भगवन् समस्त संतवृंद व वर्षीतप आराधकों को इक्षु रस दान का लाभ प्राप्त किया।इस अवसर पर वर्षीतप, एकासन, आयंबिल आदि उपवास करने वाले तपस्वियों ने सामुहिक रूप से संकल्प ग्रहण किया।इस अवसर पर वैरागन मधुरा भण्डारी दीक्षा आज्ञा हेतु आचार्य भगवन के चरणों में उपस्थित हुई उनका शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अशोक मेहता ने किया।

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