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सूरत ‘हवाला कांड’ में इनकम टैक्स की एंट्री, 1.25 करोड़ से मतदाताओं को प्रभावित करने की साजिश का खुलासा

सूरत।दिल्ली से आंगड़िया के जरिए आया पैसा; चुनाव में अशांति फैलाने की भी थी योजना, पुलिस और आईटी की संयुक्त जांच तेज
सूरत: स्थानीय स्वराज्य चुनाव से पहले सूरत में कथित ‘हवाला कांड’ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आम आदमी पार्टी से जुड़े फंडिंग नेटवर्क में अब आयकर विभाग की भी एंट्री हो गई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दिल्ली से हवाला के जरिए भेजे गए करीब 1.25 करोड़ रुपये का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मतदाताओं को प्रभावित करने और चुनाव के दौरान बवाल व अशांति फैलाने के लिए किया जाना था।
क्राइम ब्रांच को मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जनकपुरी निवासी हिमांशु पाहुजा ने सूरत की आंगड़िया फर्मों के माध्यम से बड़ी रकम ट्रांसफर की थी। महिधरपुरा स्थित ‘अरविंद हिरन’ आंगड़िया पेढ़ी में पिछले 5-6 महीनों में करीब 1.25 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस रकम को लेने के लिए सूरत के आकाश मिश्रा और अजय तिवारी बार-बार वहां आते-जाते थे।
आकाश मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और आयकर विभाग अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह पैसा किन-किन उम्मीदवारों या लोगों तक पहुंचा। जांच में हिमांशु पाहुजा की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, जो कथित रूप से आम आदमी पार्टी के एक प्रभावशाली नेता के करीबी बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में 8 से 10 लोगों का एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो चुनाव के दौरान पैसों की हेरफेर का काम करता था। पुलिस टीम अब दिल्ली जाकर हिमांशु पाहुजा से पूछताछ की तैयारी कर रही है, ताकि फंड के असली स्रोत तक पहुंचा जा सके।
जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित आंगड़िया पेढ़ी के संचालक से पूछताछ की है और वहां से महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज भी जब्त किए हैं। फुटेज में आकाश मिश्रा और अजय तिवारी को पैसे लेते हुए साफ देखा जा सकता है। इन साक्ष्यों के आधार पर जांच और तेज कर दी गई है।
फिलहाल पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी नकदी को किस वाहन के जरिए और किस तरीके से सूरत के अलग-अलग वार्डों में पहुंचाया गया। मामले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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