
सूरत। सूरत के कपड़ा उद्योग के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले कुछ वर्षों से गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण करीब 2.5 लाख श्रमिक अपने गृह राज्यों में लौट गए थे, जिससे कई टेक्सटाइल यूनिटों में उत्पादन पर गंभीर असर पड़ा था। अब गैस आपूर्ति की समस्या धीरे-धीरे दूर होने लगी है, जिसके चलते उद्योगपति श्रमिकों को वापस सूरत बुलाने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन और साउदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने संयुक्त रूप से निर्णय लिया है कि जिन श्रमिकों के पास सूरत लौटने के लिए साधन या आर्थिक सुविधा नहीं है, उनके लिए परिवहन की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर निजी बसों और अन्य वाहनों के माध्यम से श्रमिकों को सुरक्षित रूप से सूरत लाया जाएगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि श्रमिक उद्योग के लिए परिवार के सदस्यों के समान हैं और उनकी अनुपस्थिति में उत्पादन संभव नहीं है। इसलिए उद्योगपति अपने भरोसेमंद कारीगरों से लगातार संपर्क में हैं और उन्हें जल्द वापस आने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
श्रमिकों के पलायन का मुख्य कारण वाणिज्यिक गैस की कमी और ऊंची कीमतें थीं। अब राज्य सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लगभग 2500 ऐसी फैक्ट्रियों की सूची तैयार की गई है, जिन्हें 2200 से अधिक सिलेंडर की तत्काल आवश्यकता है। जिला प्रशासन द्वारा गैस वितरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कलेक्टर कार्यालय, डीएसओ और अन्य विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है, जिससे फैक्ट्रियों तक सीधे गैस सप्लाई तेजी से पहुंचाई जा सके।
ग्लोबल स्तर पर भी हालात में सुधार देखने को मिल रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी आने से उत्पादन लागत में राहत मिली है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सूरत का कपड़ा उद्योग फिर पूरी क्षमता के साथ गति पकड़ लेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।




