महंगाई की मार : पिछले 12 दिनों में आम आदमी का खर्च बढ़ा
आम आदमी की हालत “आठ आने की कमाई, एक रुपये का खर्च” जैसी

दूध, राशन और ईंधन महंगा, शादी के मौसम में सोना-चांदी खरीदना भी हुआ मुश्किल
नई दिल्ली।
देश में पिछले करीब दो सप्ताह के भीतर जरूरी वस्तुओं के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, दूध, सोना और चांदी समेत लगभग हर क्षेत्र में बढ़ती महंगाई ने मध्यम वर्ग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
पिछले 12 दिनों में ईंधन की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
सीएनजी के दामों में भी लगातार चार बार वृद्धि हुई है। ऑटो और कैब चालकों का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा अब केवल गैस भरवाने में ही खर्च हो रहा है। कई संगठनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग भी शुरू कर दी है। वैश्विक परिस्थितियों का सीधा बोझ अब आम वाहन चालकों को उठाना पड़ रहा है।

महंगाई की यह मार केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि घर के रसोईघर तक पहुंच चुकी है। बड़ी डेयरी कंपनियों ने दूध के दाम प्रति लीटर 2 से 4 रुपये तक बढ़ा दिए हैं। इससे सुबह की चाय से लेकर बच्चों के भोजन और स्ट्रीट फूड तक हर चीज महंगी हो गई है। राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ता नजर आ रहा है।
वहीं, शादी के सीजन में सोना और चांदी की बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और आयात शुल्क में बदलाव के कारण बुलियन बाजार में लगातार उछाल बना हुआ है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए आभूषण खरीदना अब एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है।
मध्यम वर्ग इस समय ईएमआई और बढ़ते खर्चों के बीच बुरी तरह दबता दिखाई दे रहा है। घर और कार की ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस तथा बिजली जैसे खर्च पहले से ही बने हुए हैं, वहीं अब जरूरी वस्तुओं के बढ़ते दामों ने लोगों की बचत पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। कई परिवारों को अपनी जमा पूंजी तक खर्च करनी पड़ रही है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक घरेलू बाजार में राहत मिलना मुश्किल है। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।




