
सूरत। वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का सीधा असर देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब सूरत पर दिखाई देने लगा है। विदेशी बाजारों में मांग घटने से शहर के कपड़ा कारोबार में मंदी का माहौल बन गया है तथा मार्केट में तैयार कपड़ों का बड़ा स्टॉक जमा होने लगा है।
सूरत से यूरोप और खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर टेक्सटाइल उत्पादों की निर्यात आपूर्ति होती है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण विदेशी ऑर्डरों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। ऑर्डर घटने से व्यापारियों के पास तैयार माल का जथ्था बढ़ता जा रहा है और नई उत्पादन गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। कई उद्योगकारों ने उत्पादन कम करने का निर्णय लिया है, जिससे उद्योग की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है।
इस बीच यार्न, रंग-रसायन तथा कोयले के बढ़ते दामों ने उत्पादन लागत में भारी वृद्धि कर दी है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने से तैयार कपड़े महंगे हो रहे हैं, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना व्यापारियों के लिए चुनौती बन गया है। गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से परिवहन लागत भी बढ़ गई है, जिससे उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
व्यापारियों के अनुसार खाड़ी और यूरोपीय देशों के लिए होने वाली शिपमेंट में देरी हो रही है तथा कई स्थानों पर माल की समय पर डिलीवरी संभव नहीं हो पा रही है। इसके चलते भुगतान चक्र प्रभावित हुआ है और नकदी प्रवाह की समस्या बढ़ती जा रही है। इसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों पर देखने को मिल रहा है।
उद्योग जगत का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक इसी प्रकार बनी रहीं तो टेक्सटाइल उद्योग को गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है। व्यापारियों और उद्योगकारों ने केंद्र व राज्य सरकार से राहत पैकेज तथा सहायक नीतिगत कदम उठाने की मांग की है ताकि उद्योग को पुनः गति मिल सके।
वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में सूरत का टेक्सटाइल बाजार चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है और उद्योग जगत अब सरकारी सहयोग व बाजार सुधार की दिशा में उम्मीद लगाए बैठा है।



