
सूरत। वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध की स्थिति का असर अब देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब सूरत पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कच्चे माल, जॉब वर्क और पैकिंग सामग्री के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से सूरत का कपड़ा उद्योग दबाव में आ गया है। बढ़ती लागत के कारण व्यापारियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
व्यापारियों के अनुसार मिल, ग्रे, जॉब वर्क, पैकिंग और अन्य संबंधित सामग्री के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे व्यापारियों के पास जो स्टॉक पहले से पड़ा हुआ है उसकी लागत तो बढ़ गई है, लेकिन बाजार में ग्राहकी सुस्त होने से बिक्री प्रभावित हो रही है। परिणामस्वरूप व्यापारियों की पूंजी फंसती जा रही है।
गैस सिलेंडर की कमी और कथित कालाबाजारी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। दुकानों और छोटे व्यवसायों में काम करने वाले कर्मचारियों को सिलेंडर नहीं मिलने की समस्या सामने आने लगी है। यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में बाजार में कामकाज और अधिक प्रभावित हो सकता है। यहां तक कि बाजार में चाय बेचने वाले भी चाय के दाम बढ़ाने लगे हैं, जिससे महंगाई का असर हर स्तर पर दिखाई दे रहा है।
एम्ब्रॉयडरी जॉब वर्क से जुड़े व्यापार में भी तेजी का माहौल बन गया है। साड़ी और ड्रेस पर इस्तेमाल होने वाला सिरोस डायमंड, जो पहले लगभग 9,000 रुपये में 20 किलो मिलता था, वह अब करीब 13,000 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह पाइपिंग का दाम 14 रुपये से बढ़कर 16 रुपये हो गया है। पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला पेपर पहले जहां 2.80 रुपये में मिलता था, वह अब करीब 4.20 रुपये तक पहुंच गया है।
पैकिंग सामग्री के दामों में तो मानो आग लगी हुई है। साड़ी पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला साड़ी पाउच पहले करीब 7 रुपये में मिलता था, जो अब 10 रुपये तक पहुंच गया है। प्लास्टिक थैली का भाव लगभग 1,700 रुपये से बढ़कर 2,600 रुपये हो गया है। वहीं फोम के दामों में भी तेजी जारी है—जो फोम पहले 6 रुपये में मिलता था वह अब 9 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 3 रुपये वाला फोम अब करीब 5 रुपये में मिल रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि युद्ध का असर केवल कच्चे माल तक सीमित नहीं है, बल्कि जॉब वर्क और पैकिंग सामग्री की लागत बढ़ने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। मिलों में पड़ा माल, एम्ब्रॉयडरी खातों में काम और बाजार में मौजूद स्टॉक—सभी की लागत बढ़ गई है। ऐसे में मार्च एंडिंग के समय यह स्थिति एमएसएमई क्षेत्र के लिए और अधिक मुश्किलें खड़ी कर रही है।
इसके विपरीत बाजार में वेस्टेज थैली का कारोबार करने वालों की कमाई बढ़ गई है। अधिकांश मार्केटों में वेस्टेज थैली लेने वाले पहले से तय हैं और उनके भाव भी लगभग तय रहते हैं। बाजार से निकलने वाली वेस्टेज थैलियां बाहर ऊंचे दामों में बिक रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में एक व्यापारी से ज्यादा कमाई आज वेस्टेज थैली का कारोबार करने वाला कर रहा है।
कुल मिलाकर युद्ध की लंबी अवधि सूरत के कपड़ा उद्योग के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। व्यापारियों का मानना है कि यदि लागत में बढ़ोतरी और बाजार की सुस्ती का यह दौर जारी रहा तो आने वाले समय में उद्योग की स्थिति और भी नाजुक हो सकती है।
— नारायण शर्मा




