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1000 बच्चों ने लिया चाइनीज मांजे का उपयोग ना करनें का लिया संकल्प

केयुप ने चाइनीज मांझे का बहिष्कार पोस्टर के विमोचन के दौरान बच्चों को दी जानकारी

त्यौहार मनाएं सबकें साथ ना की किसी के जान को खतरें में डालकर
बाड़मेर । पतंगबाजी में चाईनीज मांझे के बहिष्कार के बैनर का विमोचन स्थानीय तेरापंथ भवन में अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद केयुप, बाड़मेर एवं केयुप-02 द्वारा किया गया। केयुप अध्यक्ष मनीष संखलेचा व ललित छाजेड़ ने बताया कि मंगर संक्रान्ति का त्यौहार नजदीक पंतग के साथ उपयोग होने वाले खतरनाक मांजे के इस्तेमाल से मानव जीवन तक खतर में आ जाता है। हादसे इतने खतरनाक होते है कि इन्सान अपनी जान तक गवा देता है। इस मांझे का उपयोग ना हो इसलिए आमजन में जागरूकता लाना हम सब का दायित्व है। इसलिए विभिन्न संगठनों के साथ इस जानलेवा मांझे के बहिष्कार का संकल्प लिया है। केयुप द्वारा बाड़मेर नगर में चल रही 11 ज्ञान वाटिका के करीब 1000 बच्चों द्वारा चाईनीज मांझे का उपयोग नही करने का संकल्प लिया। बेजुबान पक्षियों और जानवरों के संरक्षण के लिए भी है जो हर साल इस अदृश्य मौत का शिकार बनते हैं। चाइनीज डोर, जिसे ‘खूनी मांझा’ भी कहा जाता है, अपनी मजबूती और धार के लिए जाना जाता है। पतंगबाजी की प्रतिस्पर्धा में दूसरे की पतंग काटने के लालच में लोग इस डोर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके परिणाम अत्यंत विनाशकारी होते हैं। यह डोर प्लास्टिक और रसायनों के मिश्रण से बनी होती है, जो कभी गलती नहीं है। जब यह पतंगों के साथ कटकर बिजली के तारों या पेड़ों पर फंस जाती है, तो यह आने-जाने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए मौत का जाल बन जाती है। पिछले वर्षों में ऐसी कई हृदयविदारक घटनाएं सामने आई हैं जहाँ राहगीरों के गले इस डोर से कट गए और उनकी जान चली गई। सोमवार को प्रताप जी की पोल के पास स्थित तेरापंथ भवन ज्ञान वाटिका के बच्चों की परीक्षा के दौरान बच्चों को चाईनीज मांझे के बारे में बताया गया और बच्चों ने भी चाईनीज मांझे का बहिष्कार किया। इसी प्रकार सूती डोर पर्यावरण के अनुकूल है और इससे हाथ कटने या किसी बड़े हादसे का खतरा भी न के बराबर होता है। पर्यावरण की दृष्टि से भी चाइनीज डोर एक बड़ी चुनौती है। सूती धागा समय के साथ मिट्टी में मिल जाता है, जबकि चाइनीज डोर सालों-साल जमीन और पानी को प्रदूषित करती रहती है। इसके अलावा, आसमान में उड़ने वाले पक्षी अक्सर इस बारीक डोर में उलझ जाते हैं, जिससे उनके पंख कट जाते हैं और वे तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। इसलिए जैन समाज में कहा गया है अहिंसा परमोधर्म है। संगठन के अध्यक्षों ने मिलकर समाज के हर वर्ग से अपील की जा रही है कि वे केवल अपने मनोरंजन के लिए किसी की जान को जोखिम में न डालें। दोपहिया वाहन चालकों को भी सलाह दी गई है कि वे सड़कों पर निकलते समय विशेष सावधानी बरतें और गले में मफलर या हेलमेट का प्रयोग करें ताकि लटकती हुई डोर से बचाव हो सके। यह त्यौहार खुशियों का है, और इसे सुरक्षित तरीके से मनाकर ही हम इसकी सार्थकता सिद्ध कर सकते हैं। चाईपीज मांझे के बहिष्कार बेनर विमोचन के दौरान केयुप पश्चिमी राजस्थान अध्यक्ष केवलचन्द छाजेड़, केयुप अध्यक्ष ललित छाजेड़, केयुप-02 अध्यक्ष मनीष संखलेचा, केएमपी अध्यक्षा सरिता जैन, कुशल वाटिका सहमंत्री गौतमचन्द बोथरा, प्रवीण सेठिया, प्रकाश पारख, दिनेश लूणिया, भरत छाजेड़, सम्पतराज सेठिया, कपिल बोथरा, रमेश बोथरा चोहटन, मुकेश बोहरा अमन, सुनिल बोथरा, सीए. कपिल छाजेड़, खुशाल बोथरा, चेतना धारीवाल, अनिता बोथरा, शिवानी बोथरा सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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